2025-29 के लिए पृथ्वी का औसत तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा को पार कर सकता है: डब्ल्यूएमओ

पृथ्वी

नई दिल्ली, 28 मई (पीटीआई) — विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) द्वारा बुधवार को प्रकाशित एक नई रिपोर्ट के अनुसार, 2025 से 2029 की अवधि के दौरान वैश्विक औसत तापमान के पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ने की 70 प्रतिशत संभावना है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगले पांच वर्षों में से कम से कम एक वर्ष के 2024 से भी गर्म होने की 80 प्रतिशत संभावना है।

2024 न केवल अब तक का सबसे गर्म वर्ष रहा, बल्कि यह पहला कैलेंडर वर्ष भी रहा जिसमें वैश्विक औसत तापमान 1850-1900 के आधार स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा — यह वह अवधि है जब मानवीय गतिविधियों जैसे जीवाश्म ईंधन जलाना, जलवायु पर गहरा असर डालने लगे थे।

1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा वह लक्ष्य है जिसे देशों ने 2015 के पेरिस जलवायु समझौते में स्वीकार किया था ताकि जलवायु परिवर्तन के सबसे गंभीर प्रभावों से बचा जा सके।

पेरिस समझौते में उल्लिखित 1.5 डिग्री सेल्सियस सीमा का स्थायी उल्लंघन का अर्थ है 20 से 30 वर्षों की अवधि में दीर्घकालिक ऊष्मीकरण।

देशों को इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन कार्यालय को 2031-2035 की अवधि के लिए अपनी अगली राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDCs) या राष्ट्रीय जलवायु योजनाएँ प्रस्तुत करनी हैं। इन जलवायु योजनाओं का सामूहिक उद्देश्य वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना है।

WMO की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 से 2029 के बीच हर वर्ष का वैश्विक औसत सतही तापमान 1850-1900 की तुलना में 1.2 से 1.9 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने की संभावना है।

इस अवधि के दौरान कम से कम एक वर्ष ऐसा होगा जब तापमान 1850-1900 के औसत से 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक होगा — इसकी संभावना 86 प्रतिशत है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पूरी पांच वर्षीय अवधि का औसत तापमान 1850-1900 की तुलना में 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक होने की 70 प्रतिशत संभावना है।

WMO की उप-महासचिव को बैरेट ने कहा, “हमने अभी-अभी रिकॉर्ड पर सबसे गर्म 10 वर्ष देखे हैं। दुर्भाग्यवश, यह WMO रिपोर्ट आने वाले वर्षों में किसी राहत का संकेत नहीं देती और इसका अर्थ है कि हमारी अर्थव्यवस्थाओं, हमारे दैनिक जीवन, हमारे पारिस्थितिक तंत्र और हमारे ग्रह पर नकारात्मक प्रभाव बढ़ता जाएगा।”

उन्होंने कहा, “नीतिनिर्माताओं को विज्ञान-आधारित उपकरण और जानकारी प्रदान करने के लिए जलवायु की लगातार निगरानी और पूर्वानुमान आवश्यक है ताकि हम अनुकूलन कर सकें।”

WMO ने कहा कि दक्षिण एशिया में हाल के वर्षों में (2023 को छोड़कर) सामान्य से अधिक वर्षा हुई है और यह प्रवृत्ति 2025 से 2029 तक जारी रहने की संभावना है, हालांकि कुछ मौसमों में शुष्कता भी रह सकती है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, भारत में पिछले पाँच वर्षों में से चार वर्षों में मानसून के दौरान सामान्य से अधिक वर्षा हुई है।

IMD ने इस वर्ष भी सामान्य से अधिक मानसूनी वर्षा की भविष्यवाणी की है।

WMO ने कहा कि अगले पाँच सर्दियों (नवंबर से मार्च) में आर्कटिक क्षेत्र विश्व के बाकी हिस्सों की तुलना में लगभग 2.4 डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म होगा, जो वैश्विक औसत से साढ़े तीन गुना अधिक है।

2025 से 2029 के दौरान आर्कटिक के कुछ हिस्सों जैसे बारेंट्स सागर, बेरिंग सागर और ओखोत्स्क सागर में समुद्री बर्फ और अधिक घटने की संभावना है।

WMO के अनुसार मई से सितंबर के बीच 2025-2029 के दौरान साहेल क्षेत्र, उत्तरी यूरोप, अलास्का और उत्तरी साइबेरिया में सामान्य से अधिक वर्षा हो सकती है, जबकि अमेजन क्षेत्र सामान्य से अधिक शुष्क रहने की संभावना है।
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