43 साल जेल में बिताने के बाद हत्या का मामला रद्द, फिर भी निर्वासन पर रोक लगाने का अदालतों का आदेश

Subramanyam “Subu” Vedam

फिलाडेल्फिया, 4 नवंबर (AP) — अमेरिका के दो अलग-अलग अदालतों ने आव्रजन अधिकारियों (ICE) को भारतीय मूल के एक व्यक्ति को निर्वासित करने से रोक दिया है, जो हत्या के मामले में चार दशक जेल में बिताने के बाद बरी हुआ है।

64 वर्षीय सुब्रमण्यम वेदम, जिन्हें परिवार वाले ‘सुबू’ कहते हैं, फिलहाल लुइसियाना के एलेक्जेंड्रिया में एक अल्पकालिक हिरासत केंद्र में रखे गए हैं, जहाँ निर्वासन के लिए हवाई पट्टी भी है। उन्हें पिछले हफ्ते पेंसिलवेनिया की एक जेल से यहाँ लाया गया।

एक आव्रजन न्यायाधीश ने गुरुवार को आदेश दिया कि वेदम को तब तक निर्वासित न किया जाए जब तक कि इमिग्रेशन अपील बोर्ड यह निर्णय न ले ले कि वह मामला दोबारा सुनवाई के लायक है या नहीं। इसमें कई महीने लग सकते हैं।

उसी दिन पेंसिलवेनिया की एक संघीय अदालत से भी वकीलों को राहत मिली, हालांकि उस याचिका पर आगे की कार्रवाई फिलहाल रोकी जा सकती है।

भारत में जन्मे वेदम अपने बचपन में कानूनी रूप से अमेरिका आए थे और स्टेट कॉलेज में पले-बढ़े, जहाँ उनके पिता पेन्सिलवेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर थे। उन्हें एक दोस्त की 1980 में हुई मौत के मामले में आजीवन कारावास मिला था, लेकिन इस साल वह सजा रद्द कर दी गई।

3 अक्टूबर को वेदम को जेल से रिहा किया गया, लेकिन तुरंत ही ICE ने उन्हें फिर से हिरासत में ले लिया।

ICE उन्हें उस ड्रग मामले के आधार पर निष्कासित करना चाहता है, जिसमें करीब 20 साल की उम्र में उनके खिलाफ LSD सप्लाई का आरोप था और उन्होंने ‘नो कॉन्टेस्ट’ दलील दी थी। उनके वकील तर्क दे रहे हैं कि 43 साल की गलत कैद, जिसमें उन्होंने पढ़ाई की और साथी कैदियों को पढ़ाया, इस पुराने मामले पर भारी पड़नी चाहिए।

गृह सुरक्षा विभाग की एक प्रवक्ता ने कहा कि हत्या के मामले में दोष सिद्धि रद्द होने से पुराने ड्रग मामले पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

ईमेल बयान में ट्रिशिया मैक्लॉघलिन ने कहा, “एक दोष सिद्धि को रद्द कर दिए जाने से ICE संघीय आव्रजन कानून लागू करने से नहीं रुकेगा।”

वेदम की बहन सरस्वती वेदम ने कहा कि परिवार को राहत है कि दो अलग-अलग न्यायाधीशों ने माना कि जब तक उनकी आव्रजन याचिका लंबित है, निर्वासन अनुचित होगा।

उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि अपीलीय बोर्ड भी यह मानेगा कि ऐसे व्यक्ति को निर्वासित करना एक और अन्याय होगा, जिसने अधिकतम सुरक्षा वाली जेल में 43 साल उस अपराध के लिए बिताए जो उसने किया ही नहीं, और जो 9 महीने की उम्र से अमेरिका में रह रहा है।”

(AP) GSP

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़

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