
नई दिल्ली, 1 फरवरी (पीटीआई) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को पिछले वर्ष के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि इस समुद्री बल ने अपने रणनीतिक संसाधनों की अग्रिम तैनाती की और तटीय तथा क्रीक क्षेत्रों में “उच्च सतर्कता” बनाए रखी।
भारतीय तटरक्षक बल के 50वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि बीते पांच दशकों में आईसीजी भारत की रणनीतिक संरचना का एक “महत्वपूर्ण स्तंभ” बनकर उभरा है।
1 फरवरी 1977 को स्थापित आईसीजी की परिकल्पना उभरती समुद्री चुनौतियों से निपटने और भारत के विस्तारित समुद्री हितों की सुरक्षा के लिए की गई थी।
अपने संबोधन में सिंह ने समुद्र में गश्त से लेकर समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने, जीवन रक्षक अभियानों से लेकर प्राकृतिक आपदाओं के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया तक, आईसीजी द्वारा निभाई गई विभिन्न प्रमुख भूमिकाओं का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा, “इसके अलावा, आपकी एक बड़ी उपलब्धि वह भी है जो आपने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किया, जिसे अत्यधिक संवेदनशील समुद्री माहौल में अंजाम दिया गया।”
रक्षा मंत्री ने कहा कि “तेज और सख्त प्रतिक्रिया” के तहत आईसीजी ने अपने रणनीतिक संसाधनों की अग्रिम तैनाती की, पश्चिमी तट पर निगरानी बढ़ाई और तटीय तथा क्रीक क्षेत्रों में उच्च सतर्कता बनाए रखी।
सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की बहु-स्तरीय राष्ट्रीय सुरक्षा प्रणाली में अग्रिम पंक्ति की ताकत और अंतर-सेवा समन्वय के लिए आईसीजी की भूमिका को फिर से स्थापित किया।
इस अवसर पर रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, रक्षा सचिव आर के सिंह, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी और आईसीजी के महानिदेशक परमेश शिवमणि उपस्थित थे। कार्यक्रम का आयोजन यहां भारत मंडपम में किया गया।
इस मौके पर एक स्मारक डाक टिकट भी जारी किया गया।
अधिकारियों के अनुसार, 1977 में केवल सात सतह प्लेटफॉर्म के साथ स्थापित आईसीजी आज 155 जहाजों और 80 विमानों से युक्त एक सशक्त समुद्री बल के रूप में विकसित हो चुका है। (पीटीआई)
