ISRO का गगनयान मिशन: 2025 में भारत की मानव अंतरिक्ष यात्रा का मार्ग प्रशस्त

गगनयान मिशन, भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है, जिसका लक्ष्य तीन अंतरिक्ष यात्रियों को 400 किमी की निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में तीन दिन के लिए भेजना है। पहला मानव रहित मिशन दिसंबर 2025 के लिए निर्धारित है, जबकि मानव मिशन अब 2027 की शुरुआत में लक्षित है। ISRO ऐतिहासिक मानव मिशन से पहले सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए कठोर परीक्षण कर रहा है, जिसमें मानव रहित उड़ानें और क्रू एस्केप सिस्टम की जांच शामिल है।

2025 में प्रगति: एक निर्णायक वर्ष

ISRO के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन द्वारा 2025 को “गगनयान वर्ष” घोषित किया गया है। 21 जनवरी 2025 को लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर (LPSC) ने पहले मानव रहित मिशन (G1) के लिए क्रू मॉड्यूल भेजा। इस मिशन में ह्यूमनॉइड रोबोट ‘व्योममित्रा’ शामिल होगी। श्रीहरिकोटा में इस मिशन के दौरान क्रू मॉड्यूल के सिस्टम्स, जैसे कि क्रू मॉड्यूल अपराइटिंग सिस्टम (CMUS), का परीक्षण किया जाएगा। ISRO अब तक 7,200 से अधिक परीक्षण पूरे कर चुका है, 3,000 परीक्षण शेष हैं। साथ ही, 12 फरवरी 2025 को यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) के साथ रेडियो फ्रीक्वेंसी कम्पैटिबिलिटी टेस्ट भी सफलतापूर्वक किया गया।

विस्तारित दायरा और सहयोग

गगनयान कार्यक्रम को 2028 तक आठ मिशनों (छह मानव रहित, दो मानव) तक बढ़ा दिया गया है, और इसका संशोधित बजट 20,193 करोड़ रुपये है। इसमें भविष्य के भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksh Station) के लिए भी तैयारी शामिल है। ISRO ने ऑस्ट्रेलियन स्पेस एजेंसी (ASA) और ESA के साथ सहयोग समझौते किए हैं। चार अंतरिक्ष यात्री-नामितों में से एक, ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, 2025 में स्पेसएक्स के ड्रैगन यान से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की यात्रा के लिए Axiom Space के साथ प्रशिक्षण ले रहे हैं।

चुनौतियाँ और देरी

मूल रूप से 2022 के लिए योजना बनाई गई थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण मिशन में देरी हुई। फरवरी 2025 में मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि स्पेस-ग्रेड कंपोनेंट्स की वैश्विक कमी के कारण अतिरिक्त परीक्षण जरूरी हो गए। इसके बावजूद, ISRO ने 2023 में सफलतापूर्वक टेस्ट व्हीकल अबॉर्ट मिशन-1 (TV-D1) और 2025 की शुरुआत में स्पाडेक्स डॉकिंग टेस्ट पूरे किए। 2025 में दूसरा टेस्ट व्हीकल मिशन (TV-D2) और दो और मानव रहित उड़ानें होंगी, उसके बाद मानव मिशन होगा।

वैश्विक नेतृत्व की ओर भारत का कदम

गगनयान का उद्देश्य भारत को अमेरिका, रूस और चीन जैसे मानव अंतरिक्ष उड़ान में अग्रणी देशों की कतार में शामिल करना है। LVM-3 रॉकेट, लाइफ सपोर्ट और क्रू एस्केप सिस्टम जैसी तकनीकों के साथ ISRO भविष्य के मिशनों—जैसे चंद्रमा अभियान और 2035 तक अंतरिक्ष स्टेशन—की नींव रख रहा है। इस मिशन से भारत की स्पेस इकोनॉमी 2035 तक 8 अरब डॉलर से बढ़कर 44 अरब डॉलर हो सकती है, जिसमें निजी क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों की भूमिका अहम होगी।

लेखक: मनोज एच