
नई दिल्ली, 2 जून (पीटीआई) — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को देश के तेज़ी से बढ़ते विमानन क्षेत्र में निवेश के लिए वैश्विक कंपनियों को आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि भारत में अब एक सुव्यवस्थित नियामक ढांचा, अनुपालन में सरलता और कर संरचना में सुधार है, जो निवेश के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है।
प्रधानमंत्री ने विमान रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल (एमआरओ) को उभरते हुए क्षेत्र के रूप में रेखांकित किया और कहा कि भारत विमान रखरखाव के लिए वैश्विक हब बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
वे अंतरराष्ट्रीय वायु परिवहन संघ (IATA) की 81वीं वार्षिक महासभा और वर्ल्ड एयर ट्रांसपोर्ट समिट (WATS) के पूर्ण सत्र को संबोधित कर रहे थे।
मोदी ने बताया कि 2014 में भारत में केवल 96 एमआरओ सुविधाएं थीं, जो अब बढ़कर 154 हो गई हैं। 100 प्रतिशत एफडीआई की स्वचालित अनुमति, जीएसटी में कटौती और कर सरलीकरण ने इस क्षेत्र को नई गति दी है।
उन्होंने भारत का लक्ष्य 2030 तक 4 अरब अमेरिकी डॉलर का एमआरओ हब स्थापित करने का भी उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री ने कहा, “नया भारतीय विमान अधिनियम वैश्विक मानकों के अनुरूप है, जो नियामक प्रक्रिया को सरल बनाता है और निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर प्रदान करता है।”
उन्होंने बताया कि भारत में पिछली बार IATA की वार्षिक बैठक 1983 में हुई थी। यह सम्मेलन 1,600 से अधिक प्रतिभागियों को एक मंच पर लाता है, जिनमें वैश्विक विमानन उद्योग के प्रमुख, सरकारी अधिकारी और अंतरराष्ट्रीय मीडिया शामिल हैं।
मोदी ने पिछले चार दशकों में भारत में हुए परिवर्तनकारी बदलावों को रेखांकित करते हुए कहा कि आज का भारत पहले से कहीं अधिक आत्मविश्वासी है।
उन्होंने भारत को वैश्विक विमानन प्रणाली में न केवल एक बड़ा बाजार, बल्कि नीति नेतृत्व, नवाचार और समावेशी विकास का प्रतीक भी बताया।
प्रधानमंत्री ने भारत के विमानन क्षेत्र के तीन आधार स्तंभों का उल्लेख किया:
- विशाल और आकांक्षी उपभोक्ता समाज,
- मजबूत जनसांख्यिकी और प्रतिभाशाली युवा नवप्रवर्तक,
- और एक सहायक एवं खुला नीतिगत ढांचा।
उन्होंने बताया कि भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बन गया है।
उन्होंने ‘उड़ान’ योजना की सफलता को “भारतीय नागरिक विमानन इतिहास का स्वर्णिम अध्याय” बताया और कहा कि इससे अब तक 1.5 करोड़ से अधिक यात्रियों को सस्ती हवाई यात्रा का लाभ मिला है।
मोदी ने कहा कि भारत में अब हर साल 240 मिलियन यात्री उड़ान भरते हैं और 2030 तक यह संख्या बढ़कर 500 मिलियन तक पहुँचने की संभावना है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत में सालाना 3.5 मिलियन मीट्रिक टन कार्गो हवाई मार्ग से भेजा जाता है, जो इस दशक के अंत तक 10 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुँच सकता है।
2014 में भारत के पास 74 हवाई अड्डे थे, जो अब बढ़कर 162 हो चुके हैं। भारतीय विमान कंपनियों ने 2,000 से अधिक नए विमानों के ऑर्डर दिए हैं, जो इस क्षेत्र की तीव्र वृद्धि का संकेत है।
प्रधानमंत्री ने हवाई अड्डों की वार्षिक यात्री संभालने की क्षमता को 500 मिलियन बताया और कहा कि भारत तकनीक के जरिए यात्री अनुभव के नए मानक स्थापित कर रहा है। उन्होंने सुरक्षा, दक्षता और सततता को भी समान प्राथमिकता देने की बात कही।
उन्होंने हरित प्रौद्योगिकियों, सतत विमानन ईंधन, और कार्बन उत्सर्जन में कटौती की दिशा में भारत के प्रयासों को भी रेखांकित किया।
मोदी ने यह भी कहा कि भारत को केवल एक विमानन बाज़ार के रूप में नहीं बल्कि एक ‘वैल्यू चेन लीडर’ के रूप में देखा जाना चाहिए — डिज़ाइन से लेकर डिलीवरी तक भारत वैश्विक विमानन आपूर्ति श्रृंखला का अहम हिस्सा बन रहा है।
उन्होंने “ओपन स्काईज़” और “वैश्विक कनेक्टिविटी” के सिद्धांतों के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई और शिकागो कन्वेंशन के आदर्शों के समर्थन की पुष्टि की।
वर्ल्ड एयर ट्रांसपोर्ट समिट में विमानन उद्योग से जुड़े अहम मुद्दों जैसे एयरलाइंस की अर्थव्यवस्था, कनेक्टिविटी, ऊर्जा सुरक्षा, टिकाऊ विमानन ईंधन, डिकार्बनाइजेशन का वित्तपोषण और नवाचार पर चर्चा होगी।
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