ईद-उल-अज़हा के पास आते ही कश्मीर में कुर्बानी के जानवरों की बिक्री मंद, पहलगाम आतंकी हमले का साया

Kolkata: A vendor with his goats waits for customers at a livestock market ahead of Eid al-Adha, in Kolkata, West Bengal, Wednesday, June 4, 2025.(PTI Photo/Swapan Mahapatra)(PTI06_04_2025_000308B)

श्रीनगर, 4 जून (पीटीआई) — कश्मीर, विशेषकर श्रीनगर सहित कई हिस्सों में ईद-उल-अज़हा के मद्देनज़र कुर्बानी के जानवरों की खरीदारी पर इस बार पहलगाम आतंकी हमले की गहरी छाया देखी जा रही है। कुर्बानी के जानवरों की बिक्री इस साल अब तक बेहद धीमी बनी हुई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी, के बाद लोग आर्थिक रूप से सतर्क हो गए हैं और पैसे बचाने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

इस घातक हमले के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया।

स्थानीय व्यापारी जमाल अहमद ने कहा, “पिछले महीने ही भारत और पाकिस्तान युद्ध की कगार पर थे। ऐसे माहौल में लोग गैरज़रूरी खर्च से बच रहे हैं, जिससे पिछले डेढ़ महीने में आर्थिक गतिविधियां भी मंद पड़ी हैं।”

जम्मू-कश्मीर भर से मवेशी व्यापारी श्रीनगर के टेंगपोरा स्थित अस्थायी बाजार में जानवरों की बिक्री के लिए पहुंचे हैं, लेकिन ग्राहकों की कमी से वे मायूस हैं।

सांबा जिले से आए बकरी व्यापारी मोहम्मद असीम ने कहा, “कोविड महामारी के बाद से व्यापार धीमा रहा है, लेकिन इस साल की बिक्री सबसे कमजोर है। मैं पिछले 15 वर्षों से यहां आता रहा हूं, लेकिन इस बार स्थिति सबसे खराब है।”

उन्होंने बताया, “ईद में तीन दिन ही बचे हैं और इस समय तक हम लौटने की तैयारी में रहते थे। पिछले साल भी बिक्री कमजोर थी, लेकिन तब तक आधे जानवर बिक चुके थे।”

पुंछ के बकरवाल समुदाय के मोहम्मद अख्तर ने कहा कि यदि बिक्री में सुधार नहीं हुआ तो उन्हें कुछ जानवर वापस गांव ले जाने पड़ सकते हैं।

उन्होंने बताया, “मैंने व्यापार की उम्मीद में कीमतें 50 रुपये प्रति किलो तक घटा दी हैं। पिछले साल मैंने 380 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा था, इस साल ग्राहक 350 रुपये पर भी मोलभाव कर रहे हैं।”

ईदगाह क्षेत्र में श्रीनगर के सबसे बड़े कुर्बानी बाजार सहित अन्य स्थानों पर भी व्यापार सुस्त है, हालांकि देश के अन्य राज्यों से आयातित काजूवाला, जैसलमेरी और मारवाड़ी जैसी गैर-स्थानीय नस्लों की भेड़ें इस बार घाटी में काफी दिख रही हैं।

व्यापारियों के अनुसार ऊंट और भैंस जैसे अन्य जानवरों की बिक्री भी मंदी का शिकार है।

ईद की खरीदारी से जुड़ी अन्य गतिविधियों जैसे बेकरी, मिठाई, रेडीमेड कपड़ों और क्रॉकरी की दुकानों पर भी भीड़ नदारद है, जबकि हर साल यहां ग्राहकों की भारी भीड़ देखी जाती थी।

ईद-उल-अज़हा शनिवार को मनाई जाएगी, जो हज़रत इब्राहीम की कुर्बानी की परंपरा की याद में मनाई जाती है। पीटीआई एमआईजे एआरआई एआरआई

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