सरकार ने भारत की 16वीं जनगणना और जातिगत गणना 2027 के लिए कार्यक्रम घोषित किया

नई दिल्ली, 4 जून (पीटीआई) — केंद्र सरकार ने बुधवार को भारत की 16वीं जनगणना 2027 में जातिगत गणना के साथ करने की घोषणा की, जिसमें बर्फबारी वाले क्षेत्रों के लिए संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर 2026 और शेष भारत के लिए 1 मार्च 2027 निर्धारित की गई है।

गृह मंत्रालय ने कहा कि यह जनगणना दो चरणों में की जाएगी, जिसमें जातियों की गणना भी शामिल होगी। यह जनगणना 16 वर्षों के अंतराल के बाद होगी, क्योंकि पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। इस बार लगभग 30 लाख गणनाकार और पर्यवेक्षक इस विशाल कार्य में लगाए जाएंगे।

मंत्रालय ने बताया, “जनगणना 2027 के लिए संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि (00:00 बजे) होगी। जबकि लद्दाख, जम्मू-कश्मीर के गैर-समानांतर बर्फीले क्षेत्र, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लिए यह तिथि 1 अक्टूबर 2026 की मध्यरात्रि होगी।”

जातिगत गणना की आखिरी बार व्यापक रूप से गिनती ब्रिटिश शासन के दौरान 1881 से 1931 के बीच की गई थी। 2011 में तत्कालीन यूपीए सरकार के तहत सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (SECC) हुई थी, लेकिन उसके आंकड़े पूर्ण रूप से सार्वजनिक नहीं किए गए।

हाल के वर्षों में बिहार और तेलंगाना ने अपने स्तर पर जातिगत सर्वेक्षण कराए हैं।

सरकार ने यह भी कहा कि जनगणना की अधिसूचना “संभावित रूप से 16 जून 2025 को” सरकारी गजट में प्रकाशित की जाएगी।

जनगणना की दूसरी और अंतिम चरण फरवरी 2027 में शुरू होगी और 1 मार्च तक चलेगी। वहीं हाउस लिस्टिंग का कार्य अप्रैल 2026 से शुरू हो सकता है। इससे पहले, लाखों गणनाकारों और पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

2027 की यह जनगणना पहली डिजिटल जनगणना भी होगी, जिसमें नागरिकों को स्वयं गणना करने का विकल्प दिया जाएगा। अनुमान है कि इस पूरी प्रक्रिया में सरकार को ₹13,000 करोड़ से अधिक खर्च करना पड़ सकता है।

केंद्र सरकार की अप्रैल 2024 की बैठक में यह फैसला लिया गया कि आगामी जनगणना में जातिगत गणना को शामिल किया जाएगा। इससे पहले केंद्र ने स्पष्ट किया था कि अलग-अलग राज्यों द्वारा किए गए जातिगत सर्वेक्षण पारदर्शिता और उद्देश्य की दृष्टि से एकरूप नहीं थे और कभी-कभी राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित लगते हैं।

सरकार का कहना है कि मुख्य जनगणना के साथ जातिगत गणना करने से सामाजिक ढांचा राजनीतिक दबाव से सुरक्षित रहेगा और आर्थिक-सामाजिक मजबूती को बढ़ावा मिलेगा।

जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियम, 1990 के तहत जनगणना भारत में एक दशक में एक बार की जाने वाली प्रक्रिया है।

2011 की जनगणना दो चरणों में हुई थी — पहला चरण (हाउस लिस्टिंग) अप्रैल से सितंबर 2010 तक और दूसरा चरण (जनसंख्या गणना) फरवरी 2011 में। 2021 में भी जनगणना दो चरणों में होनी थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित कर दी गई थी।

जनगणना के दौरान नागरिकों से पूछे जाने वाले सवालों में शामिल हैं: क्या परिवार के पास फोन, इंटरनेट, मोबाइल, बाइक, कार, एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन है, घर का मुख्य ईंधन क्या है, पीने के पानी का स्रोत क्या है, शौचालय की स्थिति और घर का निर्माण किस सामग्री से हुआ है।

जनगणना में कम से कम 100 राष्ट्रीय प्रशिक्षक होंगे, जो 1800 मास्टर प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे। ये मास्टर प्रशिक्षक लगभग 45,000 फील्ड प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे, जो आगे चलकर 30 लाख गणनाकारों और पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण देंगे।

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