
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक इच्छाशक्ति और मार्गदर्शन के कारण ही 272 किलोमीटर लंबी उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेलवे लिंक (USBRL) परियोजना पूरी हो पाई, जिससे कश्मीर अब देश के बाकी हिस्सों से हर मौसम में जुड़ गया है।
मुख्य बिंदु:
- प्रधानमंत्री मोदी 6 जून, 2025 को दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल चिनाब ब्रिज और भारत के पहले केबल-स्टे रेल ब्रिज अंजी का उद्घाटन करेंगे।
- कटरा से श्रीनगर और श्रीनगर से कटरा के बीच दो वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई जाएगी, जिससे तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों को तेज, आरामदायक और विश्वसनीय यात्रा विकल्प मिलेगा।
- पीएम मोदी कटरा में 46,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन भी करेंगे।
USBRL प्रोजेक्ट का सफर
- परियोजना की शुरुआत 1997 में हुई थी, लेकिन 2004 से 2014 के बीच केवल समतल क्षेत्रों में काम हुआ, जबकि कठिन इलाकों में प्रगति नहीं हो पाई थी।
- मोदी सरकार के आने के बाद तकनीकी चुनौतियों को पार करते हुए, भूगर्भीय, स्थलाकृतिक और मौसम संबंधी समस्याओं के बावजूद, परियोजना को पूरा किया गया।
- कुल 272 किमी में 36 सुरंगें (119 किमी लंबी) और 943 पुल शामिल हैं, और इसकी लागत लगभग 43,000 करोड़ रुपये रही।
चिनाब और अंजी ब्रिज: इंजीनियरिंग का चमत्कार
- चिनाब ब्रिज, नदी तल से 359 मीटर ऊंचा है, जो एफिल टॉवर से 35 मीटर ऊंचा है, और यह दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज है।
- अंजी ब्रिज भारत का पहला केबल-स्टे रेल ब्रिज है, जिसे विशेष डिजाइन के साथ चुनौतीपूर्ण भूभाग में बनाया गया है।
- इन पुलों के निर्माण में अत्याधुनिक तकनीक और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया है, जिससे ये हर मौसम और भूकंप जैसी आपदाओं में भी सुरक्षित हैं।
कनेक्टिविटी और विकास
- यह रेल लिंक कश्मीर घाटी को हर मौसम में देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है, जिससे क्षेत्रीय गतिशीलता और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
- वंदे भारत ट्रेनें तीर्थयात्रा, पर्यटन और व्यापार को नई गति देंगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
- रेलवे मंत्री ने बताया कि भविष्य में घाटी, जम्मू, कटरा और उधमपुर में चार टर्मिनल बनाए जाएंगे, जिससे माल परिवहन भी आसान होगा।
रेल मंत्री के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी की राजनीतिक इच्छाशक्ति, तकनीकी नवाचार और केंद्र सरकार के निरंतर समर्थन के कारण ही यह ऐतिहासिक कश्मीर रेल प्रोजेक्ट पूरा हो पाया, जो अब ‘नए कश्मीर’ की नई जीवनरेखा बन गया है
