दिल्ली में दो अलग-अलग धोखाधड़ी और जालसाजी के मामलों में एक दशक से फरार चल रहे राज कुमार शर्मा को दिल्ली पुलिस ने उत्तराखंड के हरिद्वार से गिरफ्तार किया है। 52 वर्षीय शर्मा वर्षों से फर्जी पहचान के साथ ‘डॉक्टर साहब’ के नाम से स्थानीय लोगों के बीच जाना जाता था और खुद को AIIMS-ऋषिकेश से जुड़ा बताता था।
शर्मा पर 2007 में रूप नगर थाने में सरकारी बैंकों से फर्जी दस्तावेज़ों के ज़रिए वाहन ऋण लेने का आरोप था। प्रारंभिक जांच में उसके पास से फर्जी कागजों पर खरीदी गई कार भी बरामद हुई थी। जमानत पर रिहा होने के बाद वह अदालत में पेश नहीं हुआ और 2016 में उसे घोषित अपराधी घोषित कर दिया गया।
2015 में बुराड़ी थाने में दर्ज दूसरे मामले में उस पर फर्जी दस्तावेज़ों के ज़रिए दो लोगों से 14.10 लाख रुपये लेकर प्लॉट बेचने का आरोप है। मामले को रफा-दफा करने के लिए उसने बंद हो चुके खाते से 26 लाख रुपये का चेक दिया, जिससे पीड़ितों को धोखाधड़ी का पता चला और वे पुलिस के पास पहुंचे।
दिल्ली से फरार होने के बाद शर्मा ने कई बार अपनी पहचान, रूप और ठिकाने बदले, मोबाइल नंबर भी बदलता रहा ताकि पुलिस की पकड़ से दूर रह सके। पूछताछ में उसने बताया कि वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर का रहने वाला है और दिल्ली के बुराड़ी में पत्रिका व अखबार छापा करता था, फिर धोखाधड़ी के रास्ते पर चल पड़ा।
पुलिस के अनुसार, शर्मा का बेटा हरिद्वार में बीफार्मा और बेटी लॉ की पढ़ाई कर

