दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस), द्वारका के छात्रों के अभिभावकों ने शनिवार को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन पर मनमानी फीस वृद्धि, भेदभाव और छात्रों के उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए। प्रदर्शन में कई अभिभावक संघों ने भी समर्थन दिया और निजी स्कूलों द्वारा शिक्षा विभाग के आदेशों की बार-बार अनदेखी को उजागर किया।
अभिभावकों का कहना है कि स्कूल ने बिना सरकारी मंजूरी के फीस में भारी बढ़ोतरी की है और फीस न देने पर छात्रों को स्कूल से निष्कासित कर दिया गया। कई मामलों में छात्रों को स्कूल गेट पर रोक दिया गया, कुछ को लाइब्रेरी में बंद किया गया या तेज धूप में बैठने के लिए मजबूर किया गया। अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल ने विरोध करने वालों को डराने के लिए बाउंसरों की तैनाती की।
प्रदर्शनकारियों ने “हमारी मांगें पूरी करो” और “छात्र उत्पीड़न बंद करो” जैसे नारे लगाए और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
अभिभावकों ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि अगर स्कूल शिक्षा नियमावली की धारा 35 के तहत कार्रवाई करना चाहता है, तो पहले छात्रों या उनके अभिभावकों को सूचना देनी होगी और उन्हें अपनी बात रखने का पूरा मौका देना होगा। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि फीस बढ़ोतरी का केवल 50% हिस्सा जमा करने पर छात्रों को कक्षाओं में जाने दिया जाए, जबकि मूल फीस पूरी देनी होगी।
अभिभावकों का आरोप है कि बार-बार सरकारी निर्देशों के बावजूद स्कूल मनमानी कर रहा है और बच्चों के अधिकारों का हनन हो रहा है।
उन्होंने शिक्षा विभाग और प्रशासन से बच्चों के अधिकारों की रक्षा और नियमों का पालन सुनिश्चित करने की मांग की है।

