अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर हमला किया, ट्रंप ने कहा – इज़राइली हवाई अभियान में अमेरिका की सीधी भागीदारी।

President Donald Trump speaks from the East Room of the White House in Washington, Saturday, June 21, 2025, after the U.S. military struck three Iranian nuclear and military sites, directly joining Israel's effort to decapitate the country's nuclear program, as Vice President JD Vance, Secretary of State Marco Rubio and Defense Secretary Pete Hegseth listen. (AP/PTI) (AP06_22_2025_000001B)

वॉशिंगटन, 22 जून (एपी) – राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी सेना ने ईरान में तीन ठिकानों पर हमला किया है, जिससे अमेरिका सीधे तौर पर इज़राइल के उस अभियान में शामिल हो गया है जिसका उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को जड़ से खत्म करना है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब तेहरान की ओर से प्रतिशोध की धमकी दी जा रही है, जिससे क्षेत्रीय संघर्ष और गहरा सकता है।

ईरान ने तुरंत इन हमलों की पुष्टि नहीं की है।

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब इज़राइल पिछले एक सप्ताह से ईरान पर लगातार हमले कर रहा है, जिनका उद्देश्य उसकी हवाई रक्षा प्रणाली और मिसाइल क्षमताओं को खत्म करना तथा उसके परमाणु संवर्धन स्थलों को नुकसान पहुंचाना है।

अमेरिकी और इज़राइली अधिकारियों का कहना है कि अमेरिकी स्टील्थ बॉम्बर्स और 30,000 पाउंड (13,500 किग्रा) वजनी “बंकर बस्टर” बम ही गहराई में स्थित ईरानी परमाणु स्थलों को नष्ट करने का सबसे कारगर तरीका हैं।

ट्रंप ने शनिवार को सोशल मीडिया पर लिखा: “हमने ईरान के तीन परमाणु स्थलों – फोर्डो, नतान्ज़ और इस्फहान – पर अपना अत्यंत सफल हमला पूरा किया है। सभी विमान अब ईरानी वायुसीमा से बाहर हैं। हमने मुख्य स्थल फोर्डो पर पूरी तरह बम गिराए। सभी विमान सुरक्षित लौट रहे हैं।” उन्होंने आगे लिखा: “यह अमेरिका, इज़राइल और पूरी दुनिया के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। ईरान को अब यह युद्ध समाप्त करना होगा। धन्यवाद!”

ट्रंप ने कहा कि B-2 स्टील्थ बॉम्बर्स का उपयोग किया गया, लेकिन बमों के प्रकार की जानकारी नहीं दी। व्हाइट हाउस और पेंटागन ने अभी तक इस अभियान पर विस्तार से कुछ नहीं कहा है।

ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका इज़राइल के हमले में शामिल होता है तो वह प्रतिशोध लेगा। यह फैसला ट्रंप के उस वादे के भी विपरीत है जिसमें उन्होंने अमेरिका को विदेशी युद्धों से दूर रखने की बात कही थी।

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने चेतावनी दी थी कि ईरान पर कोई भी हमला अमेरिका के लिए “अपूरणीय क्षति” का कारण बनेगा। वहीं ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा था कि “अमेरिकी हस्तक्षेप पूरे क्षेत्र में युद्ध छेड़ देगा।”

ट्रंप ने पहले कहा था कि वह ईरान में जमीनी सेना भेजना नहीं चाहते, और यह “सबसे आखिरी विकल्प” होगा। उन्होंने दो सप्ताह के भीतर निर्णय लेने की बात कही थी, लेकिन महज़ दो दिन में ही हमला कर दिया।

इज़राइल के अनुसार, उसके हमलों से ईरान की हवाई रक्षा प्रणाली पहले ही काफी हद तक नष्ट हो चुकी है और कई परमाणु स्थलों को नुकसान पहुंचाया जा चुका है।

फोर्डो जैसे गहराई में स्थित ठिकानों पर हमला करने के लिए इज़राइल ने अमेरिकी ‘बंकर बस्टर’ बम की मदद मांगी थी, जिसे केवल अमेरिका का B-2 बॉम्बर ही ले जा सकता है। इस बम की क्षमता सतह से लगभग 200 फीट नीचे तक विस्फोट करने की है।

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने पुष्टि की है कि फोर्डो में उच्च स्तर का संवर्धित यूरेनियम तैयार किया जा रहा है। यदि GBU-57 A/B बम का उपयोग किया गया, तो क्षेत्र में परमाणु सामग्री के रिसाव की संभावना है।

ट्रंप का यह निर्णय ऐसे समय में आया जब उनकी सरकार ने दो महीने तक ईरान के साथ उच्च स्तरीय वार्ताएं कीं, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।

अब ट्रंप स्पष्ट रूप से कड़ी चेतावनियों से आगे बढ़कर सीधे कार्रवाई की दिशा में चले गए हैं। उन्होंने खामेनेई को भी चेतावनी दी: “हमें ठीक-ठीक पता है वह कहां छिपे हैं… हम उन्हें अभी नहीं मारने जा रहे – कम से कम फिलहाल नहीं।”

यह सैन्य टकराव 2018 में ओबामा प्रशासन द्वारा किए गए परमाणु समझौते से ट्रंप के हटने के सात साल बाद आया है। 2015 का वह समझौता ईरान और विश्व शक्तियों के बीच हुआ था, जिसमें यूरेनियम संवर्धन को सीमित करने के बदले आर्थिक प्रतिबंध हटाए गए थे।