सरकार ने कैब एग्रीगेटर्स को पीक-आवर्स में बेस किराए का दो गुना तक चार्ज करने की अनुमति दी

नई दिल्ली, 2 जुलाई (पीटीआई) — सड़क परिवहन मंत्रालय ने कैब एग्रीगेटर्स (जैसे ओला, उबर आदि) को अब पीक-आवर्स (अत्यधिक मांग के समय) में बेस किराए का अधिकतम दो गुना तक चार्ज करने की अनुमति दी है। पहले यह सीमा 1.5 गुना थी। वहीं, नॉन-पीक-आवर्स (सामान्य समय) में किराया बेस फेयर का न्यूनतम 50% होना चाहिए।

मंत्रालय द्वारा जारी ‘मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस 2025’ के अनुसार:

  1. एग्रीगेटर न्यूनतम बेस फेयर से 50% कम और अधिकतम दो गुना तक डायनामिक प्राइसिंग कर सकते हैं।
  2. बेस फेयर राज्य सरकार द्वारा निर्धारित किया जाएगा और यह न्यूनतम तीन किलोमीटर के लिए लागू होगा, ताकि “डेड माइलेज” (बिना यात्री के वाहन द्वारा तय की गई दूरी) की भरपाई हो सके।
  3. बुकिंग रद्द करने पर, यदि ड्राइवर बिना वैध कारण के बुकिंग कैंसिल करता है, तो उस पर किराए का 10% (अधिकतम ₹100) तक का जुर्माना लगेगा। इसी तरह, यात्री द्वारा बिना वैध कारण के रद्दीकरण पर भी यही जुर्माना लगेगा।
  4. एग्रीगेटर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके सभी ड्राइवरों के पास कम-से-कम ₹5 लाख का स्वास्थ्य बीमा और ₹10 लाख का टर्म इंश्योरेंस हो।
  5. कोई भी वाहन जो पंजीकरण की तारीख से आठ साल से अधिक पुराना है, उसे प्लेटफॉर्म पर शामिल नहीं किया जा सकेगा।
  6. राज्य सरकारों को तीन महीने के भीतर इन संशोधित दिशानिर्देशों को अपनाने की सलाह दी गई है।

इसके अलावा,

  1. एग्रीगेटर्स को शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त करना अनिवार्य होगा।
  2. केंद्र सरकार एक पोर्टल विकसित करेगी, जिससे एग्रीगेटर लाइसेंस के लिए सिंगल-विंडो क्लियरेंस मिल सकेगा। लाइसेंस शुल्क ₹5 लाख होगा और यह पांच वर्षों के लिए वैध रहेगा।

इन नए नियमों का उद्देश्य कैब एग्रीगेटर्स के लिए किराया निर्धारण में पारदर्शिता और लचीलापन लाना, साथ ही उपभोक्ताओं और ड्राइवरों के हितों की सुरक्षा करना है।