शिवसेना (यूबीटी) के चुनाव चिन्ह विवाद पर सुप्रीम कोर्ट 14 जुलाई को करेगा सुनवाई

नई दिल्ली, 2 जुलाई (पीटीआई) — महाराष्ट्र में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट ने बुधवार को शिवसेना के विवादित चुनाव चिन्ह के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में तत्काल सुनवाई की मांग की।

यह मामला जस्टिस एम. एम. सुंद्रेश और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ के समक्ष रखा गया, जिन्होंने इसे 14 जुलाई को सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।

शिवसेना (यूबीटी) के वकील ने अदालत को बताया कि राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों की अधिसूचना जल्द ही जारी हो सकती है।

एकनाथ शिंदे गुट के वकील ने कहा कि इसी तरह की अर्जी 7 मई को जस्टिस सूर्यकांत की पीठ के समक्ष भी दी गई थी, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया था।

यूबीटी गुट के वकील ने तर्क दिया कि जस्टिस कांत की पीठ ने कहा था कि इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के आंशिक अवकाश के दौरान भी उल्लेखित किया जा सकता है, क्योंकि यह “जनता की पसंद” का सवाल है।

याचिका में एनसीपी के चुनाव चिन्ह विवाद की तरह ही अंतरिम व्यवस्था की मांग की गई है।

पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने अजित पवार गुट को निर्देश दिया था कि वे अखबारों में यह स्पष्ट करें कि ‘घड़ी’ चुनाव चिन्ह का मामला अदालत में लंबित है।

सुप्रीम कोर्ट ने 6 मई को राज्य के स्थानीय निकाय चुनावों का रास्ता साफ किया था, जो आरक्षण विवाद के चलते पांच साल से रुके थे, और चुनाव आयोग को चार हफ्ते में अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया था।

7 मई को सुप्रीम कोर्ट ने उद्धव ठाकरे गुट को स्थानीय निकाय चुनावों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा था, जब पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष द्वारा ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिन्ह एकनाथ शिंदे गुट को देने के फैसले के खिलाफ तत्काल सुनवाई की मांग की थी।

यूबीटी गुट के वकील ने दलील दी थी कि 2023 में विधानसभा अध्यक्ष ने केवल विधायी बहुमत के आधार पर ‘धनुष-बाण’ चिन्ह शिंदे गुट को दे दिया, जो सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के फैसले के विपरीत है।