नई दिल्ली, 2 जुलाई (पीटीआई) — दिल्ली सरकार ने बुधवार को कहा कि वह राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण कम करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) को देगी और साथ ही पिछली आप सरकार पर इस मुद्दे पर निष्क्रियता का आरोप लगाया।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली के मंत्री पंकज सिंह और मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि पुराने वाहनों के खिलाफ की गई कार्रवाई राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के 2014 से जारी कई आदेशों और 2018 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद की गई है।
आप पार्टी ने पुराने वाहनों को ईंधन न देने के फैसले की आलोचना करते हुए इसे “तुग़लकी आदेश” और आम जनता विरोधी, कॉरपोरेट समर्थक बताया है।
इन आदेशों के तहत दिल्ली की सड़कों पर 15 साल से पुराने पेट्रोल और 10 साल से पुराने डीजल वाहनों के चलने पर रोक है, क्योंकि ये वायु प्रदूषण में बड़ा योगदान देते हैं।
परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने कहा, “यह दोषारोपण का विषय नहीं है, बल्कि पिछली सरकार की विफलता का नतीजा है कि प्रदूषण पर काबू नहीं पाया गया।”
पर्यावरण मंत्री सिरसा ने कहा, “NGT ने 2014 में ही 15 साल पुराने पेट्रोल और 10 साल पुराने डीजल वाहनों के पंजीकरण रद्द करने और बैन लगाने के निर्देश दिए थे, लेकिन आप सरकार ने इन्हें नजरअंदाज किया। नतीजतन, प्रदूषण बढ़ता गया और अदालत को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ा।”
अगर समय रहते NGT और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन किया गया होता, तो दिल्ली की स्थिति इतनी खराब नहीं होती, सिरसा ने कहा।
उन्होंने कहा, “मुंबई, कोलकाता, चेन्नई या बेंगलुरु जैसे अन्य महानगरों में ऐसी सख्त वाहन बंदी की जरूरत नहीं पड़ी, लेकिन दिल्ली में पिछली सरकार की लापरवाही के कारण यह जरूरी हो गया।”
सिरसा ने आरोप लगाया कि आप सरकार ने न तो जनता के स्वास्थ्य की रक्षा की, न ही वाहन मालिकों के हितों की।
उन्होंने कहा, “जब AQI स्तर नहीं घटा और साल दर साल प्रदूषण बढ़ता गया, तो अदालतों को हस्तक्षेप कर blanket ban लगाना पड़ा।”
मंत्री ने घोषणा की कि रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार जल्द ही CAQM को प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों की पूरी जानकारी देगी।
सिरसा ने कहा, “हम सारे तथ्य सामने रखेंगे—कौन-कौन से कदम उठाए, कैसे लागू किए, और कैसे हम उस हवा को साफ कर रहे हैं, जिसे पिछली सरकार ने बिगाड़ा।”
आप पार्टी ने 10 साल से पुराने 60 लाख वाहनों को दिल्ली की सड़कों से अचानक हटाने के निर्देश को आम आदमी के खिलाफ और ऑटोमोबाइल कंपनियों के पक्ष में बताया है।
विपक्ष की नेता आतिशी ने आरोप लगाया कि बीजेपी को चुनाव के लिए ऑटोमोबाइल कंपनियों से “चंदा” मिला है, और पार्टी को इसका खुलासा करना चाहिए।

