नई दिल्ली, 2 जुलाई (पीटीआई) — कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि शशि थरूर हाल ही में जिस सरकारी प्रतिनिधिमंडल के साथ विदेश गए थे, उसमें शामिल होने के नाते उन्हें सरकार का पक्ष रखना ही था। थरूर के हालिया बयानों को लेकर पार्टी नेतृत्व में नाराजगी है, इसी बीच चव्हाण का यह बयान आया है।
चव्हाण ने कहा, “जब आप सरकारी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनने के लिए सहमत होते हैं, तो आपका मुख्य उद्देश्य भारत सरकार का पक्ष रखना होता है, चाहे आप किसी भी पार्टी से हों। यह एक प्रतिबद्धता है कि आप विदेश जा रहे हैं और वहां वही बात रखेंगे, जो सरकार चाहती है। थरूर खुद अनुभवी राजनयिक हैं। प्रतिनिधिमंडल का मकसद वहां मतभेद दिखाना नहीं था।”
हालांकि, चव्हाण ने यह भी कहा, “अब आगे थरूर के साथ क्या होगा, यह मुझे नहीं पता और मैं उस पर टिप्पणी नहीं करना चाहता।”
थरूर और चव्हाण दोनों ही कांग्रेस के ‘G-23’ समूह का हिस्सा रहे हैं, जिसने 2020 में पार्टी संगठन में बदलाव के लिए सोनिया गांधी को पत्र लिखा था।
पिछले दिनों पहलगाम हमले के बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों और कूटनीतिक प्रयासों पर थरूर के बयान कांग्रेस की आधिकारिक लाइन से अलग थे, जिस पर पार्टी नेतृत्व ने नाराजगी जताई थी।
चव्हाण ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद विदेश भेजे गए प्रतिनिधिमंडल को विदेश में किसी प्रभावशाली व्यक्ति से मिलने का मौका नहीं मिला, जिसके लिए उन्होंने विदेश मंत्रालय को जिम्मेदार ठहराया।
थरूर ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत का पक्ष रखने के लिए अमेरिका और चार अन्य देशों में बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था।
चव्हाण ने कहा, “यह कोई संसदीय प्रतिनिधिमंडल नहीं था, जिसे स्पीकर बनाते हैं, बल्कि सरकार द्वारा विशेष उद्देश्य के लिए चुना गया प्रतिनिधिमंडल था। सरकार ने कुछ नाम चुने, कांग्रेस ने भी कुछ नाम दिए। अगर नाम स्वीकार नहीं हुए, तो उसे सार्वजनिक नहीं करना चाहिए था।”
उन्होंने कहा, “दुर्भाग्य से, ऐसी स्थिति में अनावश्यक विवाद खड़ा हो गया, जब हम सबको यह दिखाना चाहते थे कि पूरा देश सरकार के साथ है।”
चव्हाण ने 1971 का उदाहरण देते हुए कहा कि तब इंदिरा गांधी ने भी सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजे थे—अटल बिहारी वाजपेयी को अमेरिका, पीलू मोदी को यूरोप और हीरन मुखर्जी को रूस भेजा गया था।
उन्होंने कहा, “यह प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों की गलती नहीं थी कि वे विदेश में किसी प्रभावशाली व्यक्ति से नहीं मिल सके, बल्कि यह विदेश मंत्रालय की विफलता थी।”
थरूर अक्सर अपने बयानों के कारण पार्टी के भीतर आलोचना झेलते रहे हैं।
हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने तंज कसते हुए कहा था कि पार्टी ‘देश पहले’ के मंत्र में विश्वास करती है, लेकिन कुछ लोगों के लिए ‘मोदी पहले, देश बाद में’ है।
इसके बाद थरूर ने X (ट्विटर) पर एक रहस्यमयी पोस्ट डाली—“उड़ने के लिए इजाजत मत मांगो। पंख तुम्हारे हैं। और आसमान किसी का नहीं।”A

