दिल्ली रेंट कंट्रोल एक्ट एक पुराना कानून: दिल्ली हाईकोर्ट

नई दिल्ली, 3 जुलाई (पीटीआई):

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली रेंट कंट्रोल एक्ट को “एक कालबाह्य (anachronistic) कानून” करार दिया है, जिसका “अत्यधिक दुरुपयोग” संपत्ति मालिकों को ऐसी स्थिति में पहुँचा देता है जहाँ संपन्न किराएदार “अन्यायपूर्ण ढंग से दशकों तक नाममात्र के किराए पर संपत्ति पर कब्जा किए रहते हैं”28

न्यायमूर्ति अनुप जयराम भामभानी उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे, जिनमें सदर बाजार स्थित एक संपत्ति के यूके और दुबई-निवासी मालिकों की बेदखली याचिका को 2013 में एआरसी द्वारा खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती दी गई थी।

कोर्ट ने कहा, “यह अदालत दर्ज करने के लिए विवश है कि रेंट कंट्रोल मामलों की सुनवाई के दौरान यह पाया गया है कि कई संपन्न किराएदार दशकों तक बहुत कम किराया देकर संपत्ति पर कब्जा किए रहते हैं, जिससे मकान मालिक आर्थिक रूप से बदहाल और हताश स्थिति में पहुँच जाते हैं, और यह सब एक पुराने कानून—दिल्ली रेंट कंट्रोल एक्ट—के दुरुपयोग का नतीजा है”28

हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को रद्द करते हुए याचिकाकर्ताओं को किराएदारों की बेदखली की अनुमति दी।

मालिकों ने यह कहते हुए बेदखली की मांग की थी कि वे लंदन में दो रेस्टोरेंट चलाते हैं और भारत में अपने व्यवसाय का विस्तार करने के लिए उक्त जगह की जरूरत है।

एआरसी ने यह कहते हुए बेदखली से इनकार कर दिया था कि याचिकाकर्ता लंदन और दुबई में बसे हुए हैं और उन्हें “जीविका या अस्तित्व” के लिए इस संपत्ति की आवश्यकता नहीं है, और उनकी आवश्यकता “वास्तविक जरूरत” नहीं मानी जा सकती।

हाईकोर्ट ने कहा कि “मकान मालिक की वित्तीय स्थिति या किराएदार की आर्थिक स्थिति, दिल्ली रेंट कंट्रोल एक्ट की धारा 14(1)(ई) के तहत बेदखली याचिका के निर्णय में प्रासंगिक नहीं है।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता पूरी तरह से बैठने वाले रेस्टोरेंट चलाएं या छोटा फूड टेकअवे—यह पूरी तरह उनका अधिकार है।

पृष्ठभूमि और कानूनी स्थिति:

दिल्ली रेंट कंट्रोल एक्ट, 1958, किराए की दरों और बेदखली के मामलों को नियंत्रित करता है, लेकिन इसमें किराएदारों को अत्यधिक संरक्षण मिलता है18

इसकी कठोर और पुरानी धाराओं के कारण मकान मालिकों को किराएदारों को हटाने में वर्षों लग जाते हैं और किराया इतना कम रहता है कि संपत्ति का रखरखाव तक मुश्किल हो जाता है18

इसी वजह से हाल ही में केंद्र सरकार ने इस कानून को निरस्त करने और एक संतुलित नया कानून लाने की सैद्धांतिक मंजूरी दी है, जिससे किराया बाजार दर से जुड़ सके और विवाद कम हों1

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