नई दिल्ली, 3 जुलाई (पीटीआई):
सरकारी कंपनी एनबीसीसी लिमिटेड ने नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनएफडीसी) के साथ दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम परिसर के व्यापक नवीनीकरण और पुनर्विकास के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य 5.5 एकड़ में फैले इस परिसर को विश्वस्तरीय सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करना है।
मुख्य बिंदु:
- एनबीसीसी परियोजना प्रबंधन सलाहकार (PMC) की भूमिका निभाएगा और संपूर्ण परियोजना की योजना, डिजाइन, निर्माण और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी लेगा।
- एनएफडीसी परियोजना लागत और पीएमसी शुल्क वहन करेगा।
- सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम, जो 1982 में एशियाई खेलों के दौरान बना था, दिल्ली के दक्षिण में स्थित है और इसमें चार ऑडिटोरियम हैं, जिनकी कुल क्षमता 2,600 से अधिक है।
- पिछले चार दशकों में यहां अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, संगीत कार्यक्रम और सार्वजनिक आयोजन होते रहे हैं।
पुनर्विकास की विशेषताएं:
- नया परिसर 20,000 वर्ग मीटर से अधिक निर्मित क्षेत्र में फैलेगा और अधिकतम 26 मीटर ऊंचा होगा।
- डिजाइन में LEED, IGBC और GRIHA जैसे वैश्विक ग्रीन बिल्डिंग मानकों का पालन किया जाएगा और सभी विरासत व नियामक दिशानिर्देशों का ध्यान रखा जाएगा129।
- संस्कृति और कला का केंद्र:
- ‘परफॉर्मेंस एंड थिएटर डिस्ट्रिक्ट’ में बड़े स्तर के प्रोडक्शन, संगीत कार्यक्रम और त्योहार आयोजित होंगे।
- ‘इंडियन फिल्म एंड मीडिया हब’ में फिल्म स्क्रीनिंग, प्रदर्शनियां और फिल्म इतिहास को दर्शाया जाएगा।
- ‘कन्वेंशन एंड डायलॉग फोरम’ में नीति शिखर सम्मेलन, सेमिनार और विचार-विमर्श होंगे।
- ‘आर्ट्स एंड कल्चर ज़ोन’ में दृश्य कला, मूर्तिकला और इंस्टॉलेशन के लिए जगह होगी।
- ‘कुलिनरी प्लाजा’ में भारत के क्षेत्रीय व्यंजन और ‘कल्चरल बाज़ार’ में हस्तशिल्प व किताबों की दुकानें होंगी।
- अत्याधुनिक सुविधाओं में इंटेलिजेंट लाइटिंग, गतिशील मंच वास्तुकला, इमर्सिव ऑडियो-विज़ुअल सेटअप, हाई-स्पीड डिजिटल कनेक्टिविटी और सार्वभौमिक पहुंच शामिल होगी, जिससे यह परिसर दुनिया के शीर्ष सांस्कृतिक स्थलों की टक्कर देगा।
- परियोजना की निगरानी के लिए एनएफडीसी और एनबीसीसी अधिकारियों की संयुक्त समिति बनाई जाएगी।
एनबीसीसी ने पहले भी दिल्ली में प्रगति मैदान सहित कई बड़े पुनर्विकास कार्य किए हैं।
इस परियोजना के पूरा होने के बाद सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम भारत के रचनात्मक और सांस्कृतिक परिदृश्य का एक नया वैश्विक केंद्र बन जाएगा।

