हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी बारिश, बादल फटने और भूस्खलन ने जबरदस्त तबाही मचाई है। हिमाचल में पिछले दो हफ्तों में कम से कम 69 लोगों की मौत हो चुकी है, 37 लोग लापता हैं और 110 से ज्यादा घायल हुए हैं। मंडी जिला सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां 17 मौतें और 40 से ज्यादा लोग लापता हैं। लगातार बारिश से सड़कों, पुलों, बिजली और पानी की आपूर्ति को भारी नुकसान पहुंचा है—राज्य में 700 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति का नुकसान आंका गया है। 250 से ज्यादा सड़कें बंद हैं और 700 से अधिक जलापूर्ति योजनाएं प्रभावित हुई हैं।
उत्तराखंड में भी हालात गंभीर हैं। पिछले एक महीने में राज्य में 70 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, जिनमें 20 प्राकृतिक आपदाओं और 50 सड़क हादसों में मारे गए हैं। नैनीताल के भीमताल में गुरुवार को भारतीय वायुसेना के दो जवान झील में डूब गए। राज्य के कई हिस्सों में सड़कें बंद हैं, चारधाम यात्रा बाधित हुई है और कई गांवों में खाद्यान्न की कमी हो गई है। अलकनंदा, गंगा, भागीरथी समेत कई नदियां खतरे के निशान के करीब बह रही हैं।
हिमाचल प्रदेश में 14 बादल फटने की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिससे कई गांवों में तबाही मची है। राहत और बचाव कार्य जारी हैं, एनडीआरएफ की टीमें तैनात हैं, और मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों को सहायता राशि देने की घोषणा की है।
मौसम विभाग ने हिमाचल और उत्तराखंड के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और नदी किनारे न जाने की सलाह दी है।
ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में भी जलभराव से जनजीवन प्रभावित है, जबकि पूर्वोत्तर में असम, त्रिपुरा, मिजोरम और मणिपुर के लिए ट्रेन सेवाएं बहाल कर दी गई हैं।
कुल मिलाकर, उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में मानसून का कहर जारी है, जान-माल का भारी नुकसान हो चुका है और राहत कार्यों के बावजूद हालात अभी भी गंभीर बने हुए हैं।

