नई दिल्ली, 5 जुलाई (पीटीआई) — यमुना नदी की सफाई और दिल्ली में पेयजल आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने दिल्ली जल बोर्ड (DJB) को वित्तीय स्वायत्तता प्रदान की है। अब जल बोर्ड को 50 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं को मंजूरी देने के लिए कैबिनेट की मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी।
दिल्ली सरकार के बयान के अनुसार, जल बोर्ड अब करोड़ों की परियोजनाएं स्वतंत्र रूप से क्रियान्वित कर सकेगा और बजट आवंटन से खर्च के लिए उसे कैबिनेट की स्वीकृति नहीं लेनी होगी। संशोधित प्रावधानों के तहत, जल बोर्ड अध्यक्ष 50 करोड़ रुपये तक, सीईओ 25 करोड़ रुपये तक और बोर्ड के सदस्य (प्रशासन/जल आपूर्ति/ड्रेनेज) 5 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं को मंजूरी दे सकते हैं।
इससे बोर्ड के हर स्तर पर निर्णय प्रक्रिया तेज होगी और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में अनावश्यक देरी कम होगी। नए सिस्टम के तहत जल बोर्ड नई पाइपलाइन बिछाने, बूस्टर पंपिंग स्टेशन बनाने और अन्य जल आपूर्ति ढांचे को तेजी से तैयार कर सकेगा, जिससे दिल्लीवासियों को शीघ्र राहत मिलेगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि अब जल बोर्ड यमुना शुद्धिकरण, ड्रेन-वाटर ट्रीटमेंट और नियमित पेयजल आपूर्ति जैसी उच्च लागत वाली परियोजनाएं स्वतंत्र रूप से लागू कर सकेगा, जिनके लिए अब कैबिनेट की मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकार ने जल बोर्ड की वित्तीय शक्तियां छीन ली थीं, जिससे यमुना सफाई, आधुनिक ड्रेनेज और जलापूर्ति जैसी अहम योजनाएं ठप हो गई थीं।
गुप्ता ने कहा कि अब जल बोर्ड का पूरा संचालन अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बना दिया गया है, जिससे भ्रष्टाचार की संभावना कम होगी और हर स्तर पर जिम्मेदारी तय होगी।

