नई दिल्ली, 6 जुलाई (पीटीआई) — राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने बिहार में चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। यह कवायद ऐसे समय में हो रही है जब राज्य में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं।
मनोज झा की याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग का 24 जून का आदेश संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 325 और 326 का उल्लंघन करता है और इसे रद्द किया जाना चाहिए। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह आदेश संस्थागत रूप से मताधिकार छीनने का एक औजार है, जिससे मुस्लिम, दलित और गरीब प्रवासी समुदायों को असमान रूप से निशाना बनाया जा रहा है। झा ने मांग की है कि आगामी बिहार विधानसभा चुनाव मौजूदा मतदाता सूची के आधार पर कराए जाएं।
आरजेडी और विपक्षी दलों का कहना है कि यह प्रक्रिया जल्दबाजी और अनुचित है, जिससे करोड़ों मतदाताओं का नाम सूची से हट सकता है, खासकर प्रवासी मजदूर, गरीब और अल्पसंख्यक समुदायों के लोग। याचिका में यह भी कहा गया है कि बिहार में मानसून और बाढ़ के कारण बड़ी आबादी विस्थापित रहती है, जिससे इतने कम समय में दस्तावेज़ जमा करना असंभव है।
चुनाव आयोग ने 24 जून को बिहार में SIR का आदेश जारी किया था, जिसका उद्देश्य अपात्र नामों को हटाना और केवल योग्य नागरिकों को सूची में शामिल करना बताया गया। आयोग ने कहा कि मतदाताओं को 25 जुलाई तक अपने दस्तावेज़ जमा करने होंगे, और जो ऐसा नहीं कर पाएंगे, उन्हें दावे-आपत्तियों की अवधि में मौका मिलेगा। आयोग ने शहरीकरण, प्रवास, युवा मतदाताओं की बढ़ती संख्या, मौतों की रिपोर्टिंग न होना और विदेशी अवैध प्रवासियों के नाम शामिल होने को इस कवायद की वजह बताया है।
इस आदेश के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा, एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR), पीयूसीएल और योगेंद्र यादव जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए ने चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया का बचाव किया है, जबकि विपक्षी दलों का आरोप है कि यह कवायद बिहार के लाखों मतदाताओं को मतदान के अधिकार से वंचित कर सकती है।
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