
रियो डी जनेरियो, 7 जुलाई (पीटीआई) — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के ‘आउटरीच सत्र’ में वैश्विक सहयोग और बहुध्रुवीय विश्व (Multipolar World) के लिए ब्रिक्स को उत्प्रेरक (Catalyst) की भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की ताकत इसकी विविधता और बहुध्रुववाद के प्रति साझा प्रतिबद्धता में है।
मुख्य बिंदु
- ब्रिक्स की विविधता और बहुध्रुववाद:
मोदी ने कहा, “ब्रिक्स समूह की विविधता और बहुध्रुववाद में हमारी दृढ़ आस्था हमारी सबसे बड़ी ताकत है। हमें विचार करना चाहिए कि आने वाले समय में ब्रिक्स किस तरह बहुध्रुवीय विश्व के लिए मार्गदर्शक बन सकता है।” - आंतरिक प्रणाली में सुधार की आवश्यकता:
प्रधानमंत्री ने ज़ोर दिया कि वैश्विक मंच पर गंभीरता से लिए जाने के लिए ब्रिक्स को पहले अपनी आंतरिक प्रणालियों को बेहतर बनाना होगा।
उन्होंने कहा, “सबसे पहले हमें अपनी प्रणालियों को सुधारने पर ज़ोर देना चाहिए ताकि जब हम सुधारित बहुपक्षवाद की बात करें, तो हमारी विश्वसनीयता और बढ़े।” - आर्थिक सहयोग और एनडीबी (NDB):
मोदी ने कहा कि ब्रिक्स न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) के तहत परियोजनाओं की स्वीकृति में मांग-आधारित निर्णय, दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता और मजबूत क्रेडिट रेटिंग पर ध्यान देना चाहिए। - ग्लोबल साउथ की अपेक्षाएँ:
उन्होंने कहा, “ग्लोबल साउथ की हमसे अपेक्षाएँ हैं। इन्हें पूरा करने के लिए हमें ‘लीड बाय एग्जाम्पल’ के सिद्धांत का पालन करना होगा। भारत सभी साझेदारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।” - कृषि और विज्ञान में नवाचार:
पीएम मोदी ने भारत में स्थापित ब्रिक्स एग्रीकल्चरल रिसर्च प्लेटफॉर्म का उल्लेख किया, जो कृषि बायोटेक्नोलॉजी, सटीक खेती और जलवायु अनुकूलन में श्रेष्ठ प्रथाओं के आदान-प्रदान के लिए एक मॉडल है। - ब्रिक्स साइंस एंड रिसर्च रिपॉजिटरी का प्रस्ताव:
उन्होंने अन्य विकासशील देशों को सहयोग का लाभ पहुंचाने के लिए ब्रिक्स साइंस एंड रिसर्च रिपॉजिटरी बनाने का प्रस्ताव रखा। - वैश्विक आपूर्ति शृंखला और महत्वपूर्ण खनिज:
पीएम ने कहा कि महत्वपूर्ण खनिजों और तकनीकों पर सहयोग जरूरी है और इनका हथियारकरण नहीं होना चाहिए। “हमें सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई देश इन संसाधनों का इस्तेमाल केवल अपने हित में या हथियार के रूप में न करे।” - कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर सामूहिक कार्य:
मोदी ने मानव मूल्यों पर आधारित एआई गवर्नेंस के लिए सामूहिक प्रयास का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, “AI for All के मंत्र पर काम करते हुए भारत कृषि, स्वास्थ्य, शासन और शिक्षा क्षेत्रों में एआई का व्यापक उपयोग कर रहा है।”
उन्होंने 2026 में भारत में होने वाले एआई इम्पैक्ट समिट के लिए ब्रिक्स साझेदारों को आमंत्रित किया।
निष्कर्ष
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन समूह को आंतरिक सुधार, वैश्विक साख, बहुपक्षीयता, विज्ञान-प्रौद्योगिकी सहयोग और ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में प्रेरित करता है। उनका ज़ोर था कि ब्रिक्स को ‘लीड बाय एग्जाम्पल’ के सिद्धांत पर चलकर विश्व मंच पर अपनी भूमिका को और मजबूत करना चाहिए।
