सुप्रीम कोर्ट ने कहा—संविधान में ECI की रोल रिवीजन ड्राइव का प्रावधान, लेकिन समय को लेकर उठाए सवाल

नई दिल्ली, 10 जुलाई (पीटीआई) — सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि चुनाव आयोग (ECI) द्वारा मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) संविधान के तहत अनिवार्य है, क्योंकि अनुच्छेद 326 के अनुसार केवल भारतीय नागरिकों को ही 18 वर्ष की आयु के बाद मतदान का अधिकार है। हालांकि, कोर्ट ने बिहार में चुनाव से ठीक पहले इस प्रक्रिया के समय को लेकर सवाल उठाए, यह कहते हुए कि यह कवायद “लोकतंत्र और मतदान के अधिकार की जड़ से जुड़ी है” और यदि नागरिकता की जांच ही उद्देश्य थी, तो चुनाव आयोग को पहले ही यह कदम उठाना चाहिए था।

पीठ ने यह तर्क भी खारिज कर दिया कि ECI को यह अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि संविधान चुनाव आयोग को मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने का स्पष्ट अधिकार देता है। कोर्ट ने आधार कार्ड को नागरिकता के प्रमाण के रूप में न मानने पर भी चिंता जताई, यह स्पष्ट करते हुए कि आधार नागरिकता का दस्तावेज़ नहीं है और अनुच्छेद 326 के तहत नागरिकता की जांच कानूनी आवश्यकता है।

ECI ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि बिना उचित प्रक्रिया और सुनवाई के किसी भी योग्य मतदाता को सूची से बाहर नहीं किया जाएगा। मामला अभी विचाराधीन है, जिसमें कोर्ट ने चुनाव आयोग से उसकी शक्तियों, पुनरीक्षण के समय और मतदाताओं के नाम शामिल या बाहर करने की प्रक्रिया पर जवाब मांगा है।

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