नई दिल्ली, 11 जुलाई (पीटीआई) — एनजीओ पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया (PFI) ने विश्व जनसंख्या दिवस 2025 के मौके पर कहा है कि भारत की जनसंख्या को लेकर डर या घबराहट की बहसों से आगे बढ़ना चाहिए और नीतियों का केंद्र महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की गरिमा, अधिकारों और अवसरों पर होना चाहिए।
PFI की कार्यकारी निदेशक पूनम मुत्तेजा ने कहा,
“भारत की जनसंख्या की कहानी कोई संकट नहीं, बल्कि एक चौराहा है। हमारी चुनौतियाँ महज आंकड़ों की नहीं, बल्कि न्याय, समानता और मानव क्षमता में निवेश की हैं।”
इस वर्ष विश्व जनसंख्या दिवस की थीम है:
‘युवाओं को सशक्त बनाना ताकि वे एक न्यायपूर्ण और आशावान दुनिया में अपनी पसंद के परिवार बना सकें।’
फाउंडेशन के तीन प्रमुख सुझाव
जेंडर डिविडेंड को साकार करना:
परिवार नियोजन सिर्फ महिला नसबंदी तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पुरुषों और महिलाओं दोनों की साझा जिम्मेदारी होनी चाहिए।
मुत्तेजा ने कहा, “पुरुषों को समाधान का सक्रिय हिस्सा बनना चाहिए, सिर्फ समर्थक नहीं। घर और कार्यस्थल दोनों जगह महिलाओं की सुरक्षा पुरुषों की जिम्मेदारी है।”
जनसांख्यिकीय डिविडेंड का लाभ उठाना:
भारत के पास 25 करोड़ से अधिक युवाओं की आबादी है। शिक्षा, कौशल विकास, प्रजनन स्वास्थ्य और मानसिक कल्याण में निवेश कर भारत समावेशी विकास को गति दे सकता है, खासकर किशोरियों के लिए।
सिल्वर डिविडेंड के लिए तैयारी:
2050 तक हर पांच में से एक भारतीय 60 वर्ष से अधिक आयु का होगा। ऐसे में बुजुर्गों की देखभाल, पेंशन, स्वास्थ्य सेवाएं और उम्रदराज़ लोगों के अनुकूल बुनियादी ढांचे में तत्काल निवेश जरूरी है। बुजुर्गों को आश्रित नहीं, बल्कि समाज के महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में देखा जाना चाहिए।
विविध जनसांख्यिकीय अनुभव
भारत, जो अब दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है, यहां बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में उच्च प्रजनन दर और अपूर्ण प्रजनन जरूरतें हैं, वहीं केरल और तमिलनाडु में जनसंख्या वृद्धि दर बहुत कम और उम्रदराज़ आबादी बढ़ रही है।
देश का कुल प्रजनन दर (TFR) 2.0 है, लेकिन अब भी 2.4 करोड़ विवाहित महिलाओं को गर्भनिरोधक साधनों की पहुंच नहीं है। जल्दी विवाह और असुरक्षित गर्भपात भी महिलाओं की प्रजनन स्वतंत्रता को सीमित करते हैं।
अधिकार-आधारित नीति की जरूरत
फाउंडेशन ने नीति-निर्माताओं से डर पर आधारित चर्चाओं को छोड़कर अधिकार-आधारित दृष्टिकोण अपनाने और बेहतर देखभाल प्रणाली विकसित करने की अपील की है।
“अगर हम अपनी नीतियों के केंद्र में लोगों, खासकर महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों को रखें, तो जनसंख्या प्रवृत्तियाँ कोई संकट नहीं, बल्कि एक न्यायपूर्ण और मजबूत भविष्य की राह बनेंगी,”—PFI का निष्कर्ष।
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श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़
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