नई दिल्ली, 12 जुलाई (पीटीआई) — केंद्र सरकार ने कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट्स के लिए सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) उत्सर्जन मानकों का पालन करने की समयसीमा एक बार फिर बढ़ा दी है और गंभीर रूप से प्रदूषित क्षेत्रों या एक मिलियन से अधिक आबादी वाले शहरों के बाहर स्थित संयंत्रों को इन मानकों से पूरी तरह छूट दे दी है।
पर्यावरण मंत्रालय की 11 जुलाई की अधिसूचना के अनुसार:
कैटेगरी A:
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) या एक मिलियन से अधिक आबादी वाले शहरों के 10 किमी के दायरे में स्थित संयंत्रों के लिए अनुपालन की समयसीमा दिसंबर 2024 से बढ़ाकर दिसंबर 2027 कर दी गई है।
कैटेगरी B:
गंभीर रूप से प्रदूषित क्षेत्रों या गैर-प्राप्ति शहरों के 10 किमी के दायरे में स्थित संयंत्रों के लिए अब केस-बाय-केस आधार पर समीक्षा होगी, पहले समयसीमा दिसंबर 2025 थी।
कैटेगरी C:
बाकी सभी संयंत्र, जो कैटेगरी A या B में नहीं आते, यदि वे निर्धारित चिमनी ऊंचाई के मानदंडों का पालन करते हैं, तो उन्हें SO₂ मानकों से पूरी तरह छूट मिल गई है। पहले इन्हें दिसंबर 2026 तक अनुपालन करना था।
सरकार ने यह फैसला तकनीक की सीमित उपलब्धता, लागत, कोविड-19 के कारण आपूर्ति श्रृंखला पर असर, बिजली दरों पर बोझ, और भारतीय कोयले में सल्फर की कम मात्रा जैसी वजहों से लिया है। बिजली मंत्रालय की सिफारिश और कई शोध संस्थानों की रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि SO₂ वायु प्रदूषण का बड़ा स्रोत है, जिससे PM2.5 बनता है और यह स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। भारत दुनिया में SO₂ का सबसे बड़ा उत्सर्जक है, लेकिन अधिकांश संयंत्रों में अब भी SO₂ नियंत्रण के लिए जरूरी फ्लू गैस डीसल्फराइजेशन (FGD) यूनिट्स नहीं लगी हैं।
इस फैसले से पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक असर को लेकर विशेषज्ञों ने चिंता जताई है, क्योंकि अब अधिकांश संयंत्रों को SO₂ नियंत्रण के लिए कोई बाध्यता नहीं रहेगी।
(PTI GVS RHL)
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