दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: घरेलू हिंसा कानून में पहले और दूसरे विवाह के लिए रखरखाव पाने का भेद नहीं

नई दिल्ली, 16 जुलाई (पीटीआई) — दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि घरेलू हिंसा निरोधक अधिनियम (DV Act) पहले और दूसरे विवाह में कोई अंतर नहीं करता जब बात वैवाहिक जीवन में अलग रह रही पत्नी को भरण-पोषण (maintenance) देने की हो।

जस्टिस स्वराणा कांत शर्मा की एकल पीठ ने 15 जुलाई को दिए फैसले में कहा कि यदि कोई पुरुष स्वेच्छा से किसी महिला से विवाह करता है और उसके पहले विवाह से हुए बच्चों को भी स्वीकार करता है, तो वह बाद में इसे अपनी कानूनी जिम्मेदारियों से बचने के लिए आधार नहीं बना सकता।

क्या था मामला?
एक व्यक्ति ने अदालत में याचिका दायर कर कहा था कि उसे अपनी पत्नी को रखरखाव देने से छूट दी जाए क्योंकि यह उसका दूसरा विवाह था और उसकी पत्नी के बच्चे पहले पति से थे।

लेकिन हाईकोर्ट ने कहा:

“उत्तरदात्री (पत्नी) का यह दूसरा विवाह रहा हो और उसके बच्चे पहले विवाह से हो — यह तर्क पूरी तरह से ग़लत धारणाओं पर आधारित है।”

अदालत ने आगे कहा:

“DV Act भरण-पोषण के हक को लेकर पहले या बाद के विवाह में कोई अंतर नहीं करता। विवाह में प्रवेश और पत्नी तथा बच्चों को स्वीकार करने के बाद अब याचिकाकर्ता उसे कानूनी जिम्मेदारी से बचने का बहाना नहीं बना सकता।”

ट्रायल कोर्ट के आदेश पर मुहर
हाईकोर्ट ने उस ट्रायल कोर्ट के आदेश को सही ठहराया जिसमें व्यक्ति को अपनी पत्नी को हर महीने ₹1 लाख का भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था।

हालांकि, अदालत ने यह भी सही माना कि पत्नी के दोनों बेटे वयस्क हैं, इसलिए उन्हें अलग से कोई भरण-पोषण देने की आवश्यकता नहीं है।

संपत्ति बेचने के प्रयास पर कड़ी टिप्पणी
महिला ने एक और गंभीर आरोप लगाया कि पति कार्यवाही के दौरान अपनी संपत्तियों को बेचने की कोशिश कर रहे थे ताकि उसे उसका वाजिब हिस्सा न मिल सके।

अदालत ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को उचित बताया जिसमें पति को बिना अदालत की अनुमति के कोई अचल संपत्ति न बेचने का निर्देश दिया गया।

कोर्ट ने टिप्पणी की:

“याचिकाकर्ता द्वारा संपत्ति बेचनें की कोशिश, पत्नी की आशंकाओं को बल देती है और उसकी विश्वसनीयता को कमज़ोर करती है।”

पृष्ठभूमि
पत्नी ने अदालत में कहा कि वह मानसिक, शारीरिक, आर्थिक और भावनात्मक उत्पीड़न का शिकार होने के बाद अब अपने पुश्तैनी घर में रह रही हैं। उनके मुताबिक, 1987 में पहले पति के निधन के बाद, उन्होंने अकेले अपने दो बेटों का पालन-पोषण किया।

वर्तमान पति ने शादी के समय देखभाल और उनके बच्चों को पितृत्व स्नेह देने का वादा किया था।

वहीं पति का दावा था कि पत्नी खुद ही घर छोड़कर चली गई और उसने कभी सुलह का प्रयास नहीं किया।
साथ ही उसने अपनी गंभीर बीमारी Ankylosing Spondylitis का हवाला दिया जिसे उपचार योग्य नहीं बताया।

(PTI SKV AMK)

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