नई दिल्ली, 17 जुलाई (पीटीआई) — दिल्ली की एक अदालत ने चार आरोपी व्यक्तियों को अवमानना का दोषी पाते हुए पूरे दिन अदालत में हाथ ऊपर उठाकर खड़े रहने का आदेश दिया है।
न्यायिक मजिस्ट्रेट सौरभ गोयल 2018 की एक शिकायत मामले की सुनवाई कर रहे थे, जो आरोप-पूर्व साक्ष्यों के चरण में था।
15 जुलाई के आदेश में मजिस्ट्रेट ने कहा, “सुबह 10 बजे से लेकर 11:40 बजे तक मामले को दो बार बुलाने और प्रतीक्षा करने के बावजूद आरोपीयों ने जमानत बांड नहीं दिया। अदालत के समय की बर्बादी के लिए, जो पिछले सुनवाई के आदेश का उल्लंघन है, आरोपीयों को अदालत की कार्यवाही की अवमानना का दोषी पाते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 228 (न्यायिक कार्यवाही में बैठे सरकारी अधिकारी का जान-बूझकर अपमान या बाधा) के तहत दोषी ठहराया गया।”
उन्होंने आगे आदेश दिया, “वे अदालत के समापन तक अपने हाथ सीधे ऊपर उठाकर खड़े रहें।”
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त के लिए निर्धारित की है।
आदेश में नामित आरोपी हैं कुलदीप, राकेश, उपासना और आनंद, जबकि दो अन्य आरोपी अब स्वर्गीय हो चुके हैं।
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