दिल्ली की अदालत ने MCA कर्मचारी बनकर धोखा देने वाली महिला को अग्रिम जमानत दी

नई दिल्ली, 17 जुलाई (पीटीआई) — दिल्ली की एक अदालत ने एक महिला को अग्रिम जमानत प्रदान की है, जिस पर केंद्रीय कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) की कर्मचारी बनकर धोखाधड़ी करने का आरोप है। अदालत ने कहा कि कुछ दस्तावेजों की प्रामाणिकता की जांच आवश्यक है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह ललेर इस मामले में शुषिल दास गुप्ता की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिनके खिलाफ इंदरपुरी थाना ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत, जिसमें धोखाधड़ी और जालसाजी शामिल हैं, प्राथमिकी दर्ज की है।

15 जुलाई के आदेश में अदालत ने जांच अधिकारी के जवाब को ध्यान में रखा जिसमें कहा गया था कि दास गुप्ता ने MCA के चालान, मुहरें और एक अधिकारी तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के हस्ताक्षर जालसाजी करके बनाए।

अदालत ने कहा, “आवेदक (दास गुप्ता) ने कथित तौर पर इन जालसाज दस्तावेजों का इस्तेमाल शिकायतकर्ता को 42 आईफोन और अन्य सामान के लिए 10 लाख रुपये प्रदान करने के लिए प्रेरित करने में किया। 9.66 लाख रुपये का चेक बाउंस हुआ।”

प्रतिवादी पक्ष वकील सुमित गहलोत ने बहस की कि यह मामला किसी साजिश का नहीं बल्कि एक नागरिक मौद्रिक विवाद का है।

रिण अनुबंध और अन्य रिकॉर्ड्स को देखते हुए—जिनकी प्रामाणिकता अभी सत्यापित होनी बाकी है—अदालत ने कहा कि फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) की रिपोर्ट आने तक आवेदक को जमानत का अधिकार है।

अदालत ने 20,000 रुपये का व्यक्तिगत और जमानती बांड जमा करने, देश छोड़ने से बचने, साक्ष्य में छेड़छाड़ न करने और अभियोजन गवाहों या मामले से परिचित अन्य व्यक्तियों से संपर्क न करने की शर्तों के साथ अग्रिम जमानत दी है।

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