मंडी/शिमला, 17 जुलाई (पीटीआई) — मानसून की भारी बरसात से मंडी में आई तबाही के बाद सेना, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), और इंडो-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के नेतृत्व में चल रहे बचाव कार्यों को अब चरणबद्ध तरीके से वापस लिया जा रहा है, अधिकारियों ने गुरुवार को बताया।
अब तक कुल 27 लोगों के बीच जो 10 बादल फटने, बाढ़ और लैंडस्लाइड की घटनाओं में बह गए थे, उनमें से 15 शव बरामद किए गए हैं। इसके अलावा बारिश से संबंधित घटनाओं में पांच लोग घायल भी हुए हैं।
प्राकृतिक आपदा ने सड़कों, जल और बिजली योजनाओं तथा संपत्ति को भी व्यापक नुकसान पहुंचाया है। 854 घर, 637 गौशालाएं और 166 दुकानें नुकसान की चपेट में आईं। करीब 857 पशुओं की मृत्यु भी हुई है।
मंडी के उपायुक्त अपूर्व देवगन ने कहा, “राज्य के बाहर से आई फोर्सेज को मुख्य चोटिल क्षेत्रों से चरणबद्ध तरीके से वापस लिया जा रहा है, जबकि मानसून अभी पूरे जोश में है।”
उन्होंने बताया कि ITBP की टीमें कुल्लू में, सेना पांडोह में, NDRF स्लैपर में, तथा SDRF, फायर ब्रिगेड और पुलिस कर्मी थुनाग जैसे सबसे प्रभावित इलाकों में अपने-अपने स्थानों से वापसी शुरू कर चुके हैं।
उपायुक्त ने बताया कि जो 15 शव मिले उनमें से 10 मंडी के डाउनस्ट्रीम से कांगड़ा जिले में पोंग बांध तक पाए गए हैं। उन्होंने कहा, “अब लगभग दो सप्ताह बाद बचाव की संभावनाएं कम हैं, इसलिए हम लापता लोगों को मृत घोषित करने के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं ताकि उनके परिवारों को पूरी राहत मिल सके।”
खोज अभियान के शीर्ष दौर में सेना, NDRF, ITBP, SDRF, फायर डिपार्टमेंट और पुलिस के 225 से अधिक कर्मी सक्रिय थे। इनके साथ स्थानीय स्वयंसेवक, टास्क फोर्स सदस्य, होम गार्ड, आठ ड्रोन टीम और तीन कुत्तों की टीमें भी कार्यरत थीं।
इन टीमों ने दुर्गम क्षेत्रों में फंसे लोगों को राहत सामग्री और आवश्यक वस्तुएं भी वितरित कीं।
वहीं, थुनाग जैसे सबसे प्रभावित इलाकों में अब भी 25 मेडिकल टीमें तैनात हैं।
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