
नई दिल्ली, 17 जुलाई (पीटीआई): भारत ने गुरुवार को उन आशंकाओं को खारिज किया कि अमेरिका रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध लगा सकता है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक के रूप में, भारत को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए वैकल्पिक स्रोतों से तेल आपूर्ति मिल सकती है।
भारत की कच्चे तेल की आपूर्ति—मुख्य तथ्य
- भारत अपनी आवश्यकता का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिसे रिफाइनरियों में पेट्रोल, डीजल आदि में बदला जाता है।
- पारंपरिक रूप से मध्य-पूर्व (Middle East) भारत का मुख्य आपूर्तिकर्ता रहा, लेकिन पिछले तीन वर्षों में रूस मुख्य आपूर्तिकर्ता बन गया है।
- फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद, पश्चिमी देशों ने रूसी कच्चे तेल से किनारा किया, जिससे रूस ने बड़े डिस्काउंट्स पर भारत जैसे वैकल्पिक खरीदारों को आकर्षित किया।
- इसके परिणामस्वरूप रूस, जो पहले एक मामूली आपूर्तिकर्ता था, भारत का सबसे बड़ा कच्चे तेल का स्रोत बन गया और अब कुल आयात का करीब 40% मुहैया करा रहा है।
मंत्री पुरी का बयान
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने Urja Varta 2025 सम्मलेन में कहा—
- “मुझे किसी प्रकार का दबाव महसूस नहीं होता है। भारत ने आपूर्ति के स्रोतों का विविधीकरण कर लिया है।”
- यदि रूस से आपूर्ति बाधित होती है, तो भारत ब्राज़ील, कनाडा, गुयाना जैसे विद्यमान और नए उत्पादकों से आपूर्ति बढ़ा सकता है।
- “हमने तेल खरीदने वाले देशों की संख्या 27 से बढ़ाकर 40 कर ली है।”
अमेरिकी धमकी और भारत का रुख
- हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त प्रतिबंध या टैरिफ लगाए जा सकते हैं यदि रूस ने 50 दिनों में यूक्रेन के साथ शांति समझौता नहीं किया।
- पेट्रोलियम मंत्री ने कहा, “मैं चिंतित नहीं हूं। अगर कुछ होता है, तो हम उसका मुकाबला करेंगे।”
- उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत घरेलू तेल भंडार की खोज बढ़ा रहा है और आवश्यक होने पर प्री-यूक्रेन संकट के जैसी सप्लाई व्यवस्था अपना सकता है, जब रूसी तेल का हिस्सा केवल 0.2% था।
