वॉशिंगटन, 18 जुलाई (AP): राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कोयला-चालित पावर प्लांट्स, केमिकल निर्माण इकाइयों और अन्य प्रदूषणकारी उद्योगों को दो साल के लिए नियामकीय राहत देने का निर्णय लिया है, ताकि वे बाइडेन-युग के उन नियमों से छूट प्राप्त कर सकें जिन्हें ट्रम्प जरूरत से ज्यादा बोझिल मानते हैं।
मुख्य तथ्य:
- ट्रम्प ने गुरुवार देर रात कई घोषणाएँ जारी कीं, जिनके तहत कोयला पावर प्लांट्स, टैकॉनाइट लौह अयस्क प्रोसेसिंग सुविधाएँ (स्टील उत्पादन के लिए), और ऐसे केमिकल प्लांट्स जो सेमीकंडक्टर व मेडिकल डिवाइस स्टेरिलाइजर बनाते हैं, इनमें राहत मिलेगी।
- अब ये उद्योग उन पुराने EPA (पर्यावरण संरक्षण एजेंसी) मानकों के अनुसार काम कर सकते हैं, जो बाइडेन प्रशासन द्वारा लागू किए गए ताजा नियमों से पहले लागू थे।
- बाइडेन-युग के नियमों को ट्रम्प ने महंगा और कुछ मामलों में “असंभव” बताया है। उनका कहना है कि ये राहत “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण उद्योगों को बिना अतिरिक्त लागत के निर्बाध संचालन” की अनुमति देगी।
- Clean Air Act के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार है कि यदि नई टेक्नोलॉजी उपलब्ध नहीं है और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है, तो कुछ उद्योगों को अस्थायी छूट दी जा सकती है।
- EPA ने अप्रैल में लगभग 70 कोयला-आधारित पावर प्लांट्स को जहरीली रासायनिक उत्सर्जन कम करने के नियमों से दो वर्ष की छूट दी थी।
- EPA ने कंपनियों के लिए ‘ईमेल पोर्टल’ खोला है, जिससे वे Clean Air Act के तहत ट्रम्प से छूट माँग सकते हैं। एनवायरनमेंटल समूहों ने इस कदम की निंदा करते हुए इसे ‘प्रदूषकों का पोर्टल’ बताया है, जो सैकड़ों कंपनियों को पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य संरक्षण कानूनों से बचा सकता है। जैसे: मरकरी, आर्सेनिक और बेंजीन का उत्सर्जन, जो बच्चों और गर्भस्थ शिशुओं के लिए खतरनाक सिद्ध हो सकता है।
विपक्ष की आलोचना:
- पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ताओं का दावा है कि जिन नियमों को हटाया जा रहा है, वे हर साल लगभग 30,000 मौतें रोक सकते थे और 275 अरब अमेरिकी डॉलर की बचत कर सकते थे, जैसा कि एपी (Associated Press) की जांच में सामने आया।
- EPA के प्रशासक ली ज़ेल्डिन ने मार्च में ‘दर्जनों मुख्य पर्यावरणीय नियमों’ को वापस लेने की योजना की घोषणा की थी, जिसे उन्होंने “अमेरिकी इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण डिरेगुलेशन दिवस” कहा।
निष्कर्ष:
यह कदम बाइडेन प्रशासन के कड़े पर्यावरणीय नियमों को दो साल के लिए स्थगित करेगा और इसके पीछे तर्क राष्ट्रीय सुरक्षा तथा औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को बनाए रखना है, मगर पर्यावरणीय जोखिमों को लेकर चिंता बनी हुई है।

