नई दिल्ली, 18 जुलाई (PTI) — दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को कानून विभाग को निर्देश दिया कि वह विशेषज्ञों की समितियाँ गठित करे, ताकि विभिन्न अदालतों और ट्राइब्यूनल्स में दिल्ली सरकार से संबंधित लंबित मामलों की संख्या को कम किया जा सके और अनावश्यक मुकदमेबाज़ी को समाप्त किया जा सके।
🔸 समीक्षा बैठक में लिए गए अहम निर्णय:
मुख्यमंत्री ने यह निर्देश कानून, न्याय और विधायी कार्य विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान दिया। बैठक में कानून मंत्री कपिल मिश्रा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि:
“वर्तमान में दिल्ली सरकार से संबंधित लगभग 5,000 मामले देशभर की अदालतों और ट्राइब्यूनल्स में लंबित हैं। इन मामलों की समीक्षा कर यह पहचाना जाना आवश्यक है कि कौन से मुकदमे जरूरी हैं और किन्हें समाप्त किया जा सकता है।”
🔸 विशेषज्ञ समिति का गठन
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मुख्यमंत्री ने कहा कि इस उद्देश्य के लिए सेवानिवृत्त नौकरशाहों और विषय विशेषज्ञों की एक समिति गठित की जाए जो इन लंबित मामलों की प्रकृति की जांच करे और अनावश्यक मुकदमों को समाप्त करने के लिए रणनीति सुझाए।
🔸 नए कानून बनाने की आवश्यकता
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बैठक में यह भी चर्चा हुई कि कई ऐसे क़ानून हैं जो संविधान लागू होने से पहले के हैं, जैसे कि:
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पंजाब कोर्ट्स एक्ट
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कोर्ट फीस एक्ट
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सूट वैल्यूएशन एक्ट
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मुख्यमंत्री ने इन पुराने कानूनों की जगह वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप नए कानून बनाने पर बल दिया।
🔸 सुप्रीम कोर्ट में सरकारी प्रतिनिधित्व की कमी
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बैठक में यह उल्लेख किया गया कि अन्य राज्यों की तुलना में दिल्ली सरकार के पास सुप्रीम कोर्ट में कोई समर्पित अधिवक्ता पैनल नहीं है।
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मुख्यमंत्री ने दिल्ली हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और ट्राइब्यूनलों में सरकार की प्रभावी पैरवी के लिए वरिष्ठ अधिवक्ताओं की विशेष पैनल गठित करने के निर्देश दिए।
🔸 न्यायिक अधिकारियों की कमी पर जोर
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बैठक में बताया गया कि दिल्ली में न्यायिक अधिकारियों की स्वीकृत संख्या कम है और दफ्तरों के लिए जगह भी अपर्याप्त है।
मुख्यमंत्री ने कहा:
“शास्त्री पार्क, कड़कड़डूमा और रोहिणी में तीन नए न्यायालय परिसरों का निर्माण चल रहा है जो इन समस्याओं का समाधान करेंगे।”
🔸 शपथ आयुक्तों की समीक्षा का निर्देश
रेखा गुप्ता ने शपथ आयुक्तों की नियुक्तियों की नियमित समीक्षा न होने पर चिंता जताई और कहा कि:
“कानून विभाग को तुरंत कार्रवाई कर इनकी रिकॉर्ड अद्यतन और ऑडिटिंग करनी चाहिए।”
🔸 MSMEs के लिए मध्यस्थता केंद्र का सुझाव
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मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव रखा कि दिल्ली की सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) इकाइयों के छोटे विवादों के समाधान के लिए एक कम लागत वाला और कुशल “आर्बिट्रेशन सेंटर” भी स्थापित किया जाए।
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