नई आयकर विधेयक पर संसदीय पैनल की सिफारिशें: TDS रिफंड क्लेम और ट्रस्टों पर कराधान में बदलाव के सुझाव

नई दिल्ली, 21 जुलाई (PTI) — आयकर विधेयक 2025 की समीक्षा कर रहे संसदीय समिति ने सोमवार को TDS रिफंड और गैर-लाभकारी संगठनों व ट्रस्टों के कराधान को लेकर महत्वपूर्ण सिफारिशें प्रस्तुत कीं। समिति ने कहा कि मौजूदा विधेयक में कुछ ऐसे प्रावधान हैं जो छोटे करदाताओं और धार्मिक-समर्थ charitable ट्रस्टों के लिए कठिनाइयाँ पैदा कर सकते हैं।

🔹 व्यक्तिगत करदाताओं के लिए TDS रिफंड पर राहत की सिफारिश

समिति ने सरकार से सिफारिश की कि:

“जिन लोगों की आय कर योग्य सीमा से कम है लेकिन जिनका TDS काटा गया है, वे यदि देय तिथि के बाद भी आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं तो उन्हें रिफंड क्लेम करने की अनुमति दी जाए और उन पर कोई दंड न लगे।”

समिति ने कहा कि रिटर्न नहीं भरने के लिए दंडित किया जाना उनके लिए अनुचित होगा, खासकर तब जब वे अन्यथा करदाता नहीं हैं और केवल रिफंड क्लेम करने के लिए रिटर्न दाखिल कर रहे हैं।

🔹 ट्रस्टों और एनजीओ पर गुमनाम दान के कराधान पर पुनर्विचार की सिफारिश

समिति ने “धार्मिक-सह-चैरिटेबल ट्रस्टों” को मिलने वाले गुमनाम दान (anonymous donations) पर प्रस्तावित 30 प्रतिशत कर को अनुचित बताते हुए कहा:

“ऐसे ट्रस्टों को कर छूट दी जानी चाहिए, क्योंकि इनमें अधिकांश दान ‘दान पात्र/दान पेटी’ जैसे पारंपरिक तरीकों से आते हैं जहाँ दाता की पहचान करना व्यावहारिक नहीं होता।”

संसदीय समिति ने कहा कि नया विधेयक इस मामले में 1961 के आयकर अधिनियम (धारा 115BBC) से भी अधिक सख्त है। पुरानी व्यवस्था में धार्मिक और/या चैरिटेबल संस्थाओं को गुमनाम दान पर छूट दी जाती थी, सिवाय उन दानों के जो किसी विश्वविद्यालय, मेडिकल या शैक्षिक संस्थान के लिए निर्देशित हों। समिति ने आग्रह किया कि:

1961 के अधिनियम की ‘स्पष्टीकरण’ (explanation) जैसी व्यवस्था को दोबारा शामिल किया जाए।”

🔹 एनजीओ की ‘ग्रॉस रिसीट्स’ पर टैक्स का विरोध

समिति ने इस बात पर आपत्ति जताई कि विधेयक में एनजीओ की कुल ‘रसीदों’ (gross receipts) को टैक्स के अधीन किया गया है। समिति ने सिफारिश की:

“केवल वास्तविक आय (net income) पर कर लागू हो — यानी खर्च के बाद की शुद्ध आय पर ही टैक्स लगाया जाए।”

🔹 अन्य अहम सुझाव

समिति ने 30 से अधिक अनुशंसाएँ पेश कीं, जिनमें शामिल हैं:

  • ‘कैपिटल एसेट’, ‘सूक्ष्म एवं लघु उद्योग’ जैसी परिभाषाओं को अद्यतन कानूनों के अनुरूप लाना

  • पेंशन, दान व कर कटौती (deductions) से जुड़े नियमों को सरल बनाना

  • कर प्रशासन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करना

समिति ने कहा कि यह विधेयक भारत की कर व्यवस्था को आधुनिक बनाने और करदाताओं के लिए सरल, स्पष्ट व न्याय संगत बनाने का अवसर है।

अब इस रिपोर्ट को संसद में आगे चर्चा और कार्यवाही के लिए पेश किया जाएगा।

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