नई दिल्ली, 21 जुलाई (PTI) — दिल्ली की एक विशेष अदालत ने राष्ट्रीय एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (NALCO) के पूर्व चेयरमैन-सह-प्रबंध निदेशक (CMD) अभय कुमार श्रीवास्तव, उनकी पत्नी चांदनी श्रीवास्तव, और उनके मित्र बी. एल. बजाज व उनकी पत्नी अनिता बजाज को मनी लॉन्ड्रिंग के एक हाई-प्रोफाइल केस में दोषी करार दिया है।
यह मामला 2010 में NALCO की कोल-सप्लाई टेंडर (धोया हुआ कोयला खरीद) के बदले रिश्वत लेने और धनशोधन के जरिए उसे छिपाने से जुड़ा है। विशेष न्यायाधीश शैलेन्द्र मलिक ने कहा कि सभी आरोपियों के बीच पहले से सुनियोजित साजिश और आपसी समन्वय था।
मुख्य बिंदु:
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अदालत ने आरोपियों को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 3 और 4 के तहत दोषी ठहराया।
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सजा की अवधि की घोषणा बाद में की जाएगी। PMLA के तहत अधिकतम 7 साल की सजा और जप्त संपत्ति की जब्ती का प्रावधान है।
मामला क्या था?
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यह मुकदमा मार्च 2014 में ED द्वारा दर्ज किया गया था।
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इससे पहले CBI ने फरवरी 2011 में एक FIR दर्ज की थी, जिसमें NALCO के एक कोयला खरीद टेंडर में घोटाले और रिश्वतखोरी का आरोप लगाया गया था।
अभय श्रीवास्तव पर आरोप था कि उन्होंने अपने पूर्व सहकर्मी बी. एल. बजाज (NTPC में सहकर्मी) के माध्यम से Bhatia Group से अनुचित लाभ लेकर टेंडर में लाभ पहुंचाया।
ED के अनुसार, चांदनी श्रीवास्तव ने जाली आईडी और दस्तावेजों के जरिए खुद को अनिता बजाज के रूप में प्रस्तुत कर एक बैंक लॉकर खुलवाया और वहां पर सोने की ईंटें और आभूषण रखे।
ED ने चारों आरोपियों की कुल ₹2.23 करोड़ की संपत्ति अटैच (जब्त) की थी और मर्च 2015 में चार्जशीट दाखिल की थी।
अदालत ने क्या कहा?
“अभियोजन पक्ष के रिकॉर्ड में पर्याप्त साक्ष्य हैं जो सिद्ध करते हैं कि चारों ने आपसी साजिश के तहत अवैध धन को मुख्य अपराध से अर्जित कर उसे छिपाने का प्रयास किया।”
सजा क्या हो सकती है?
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PMLA के तहत दोषियों को अधिकतम 7 साल तक की जेल हो सकती है।
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इसके साथ-साथ ED द्वारा जब्त की गई संपत्तियों की जब्ती की कार्रवाई भी हो सकती है।
यह फैसला सत्ता में बैठे उच्च अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में एक प्रमुख कानूनी सफलता मानी जा रही है।
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