नई दिल्ली, 21 जुलाई (PTI) — सूत्रों के अनुसार, दिल्ली सरकार मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में बारापुला फेज-3 एलिवेटेड रोड परियोजना से संबंधित मध्यस्थता (arbitration) के मुद्दों पर चर्चा कर सकती है।
पिछले महीने, लोक निर्माण विभाग (PWD) के मंत्री प्रवेश वर्मा ने विभाग के ठेका अनुबंधों से मध्यस्थता की शर्तों को हटाने की घोषणा की थी। इस निर्णय के बाद अब कोई भी विवाद केवल अदालत के माध्यम से सुलझाया जाएगा, जिससे मध्यस्थता की व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है।
सूत्र ने कहा,
“सबसे बड़ा मामला बारापुला फेज-3 परियोजना से जुड़ा था, जिसे कैबिनेट में चर्चा के लिए शामिल किया जा सकता है।”
“मध्यस्थता में सरकार के घाटे अधिक हुए” — मंत्री
अधिकारियों के अनुसार, मध्यस्थता का मकसद था कि विवादों को मुकदमेबाजी की बजाय तेज़ी से निपटाया जाए, लेकिन ज्यादातर मामलों में सरकार को भारी घाटा उठाना पड़ा।
PWD मंत्री प्रवेश वर्मा ने बताया,
“बारापुला फेज-3 परियोजना में, सरकार ने मध्यस्थता के फैसले के खिलाफ अपील नहीं की, जिसके कारण उसे 300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जबकि निजी कंपनी को इसका लाभ मिला।”
पिछले वर्ष, दिल्ली के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा था कि,
“964 करोड़ रुपये की निविदा राशि वाली परियोजना के लिए सरकार को आखिरकार 1,326.3 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे।”
अनुमति और देरी
यह परियोजना पहले से ही कई देरी का सामना कर चुकी है। वर्तमान में पेड़ काटने की अनुमति की प्रतीक्षा हो रही है।
PWD अधिकारियों के अनुसार, अनुमति मिलने के बाद काम छह महीने में पूरा होने की उम्मीद है।
PWD पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसे कानूनी विवादों का सामना कर चुका है, जो मुख्य रूप से परियोजनाओं में देरी और अनुमानित लागत से अधिक निर्माण खर्च के कारण उत्पन्न हुए, जिससे सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ा है।
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