बीएस-4 ट्रकों के रेट्रोफिटिंग के लिए दिल्ली सरकार मांगेगी नवोन्मेषी सुझाव

नई दिल्ली, 22 जुलाई (PTI) — राजधानी में BS-IV ट्रकों के प्रवेश पर जल्द लगने वाले प्रतिबंध को देखते हुए दिल्ली सरकार अब इन वाहनों को Bharat Stage-VI मानकों के अनुरूप बनाने के लिए रेटरोफिटिंग पर नवोन्मेषी विचार आमंत्रित करेगी, यह जानकारी मंगलवार को पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने दी।

मंत्री ने बताया कि उन्होंने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) को इस मुद्दे पर तकनीकी समाधान खोजने के लिए इन्वेशन चैलेंज आयोजित करने का निर्देश दिया है।

इस चुनौती के तहत BS-IV वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के उपाय ढूंढे जाएंगे।

“इन्वेशन चैलेंज का उद्देश्य ऐसे किफायती, रखरखाव में आसान और प्रभावी तकनीकी समाधान पहचानना और उन्हें बढ़ावा देना है, जो BS-IV वाहनों से निकलने वाले PM2.5 और PM10 प्रदूषकों को कम या अवशोषित कर सकें — कम से कम उस मात्रा से दोगुना जो वाहन उत्सर्जित करता है,” मंत्री ने कहा।

क्या हैं PM2.5 और PM10?

  • PM2.5 — 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम व्यास वाले बहुत ही महीन कण होते हैं, जो फेफड़ों में गहराई तक जाकर यहां तक कि रक्तप्रवाह में भी प्रवेश कर सकते हैं।

  • PM10 — 10 माइक्रोमीटर या उससे कम व्यास वाले अपेक्षाकृत बड़े कण होते हैं जो सांस की नली में जलन पैदा कर सकते हैं और श्वसन संबंधी परेशानियाँ बढ़ा सकते हैं।

1 नवंबर से लागू होगी सख्ती

मंत्री ने कहा,

“1 नवंबर से केवल BS-VI, CNG या इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहन ही दिल्ली में प्रवेश कर पाएंगे। ऐसे में यदि अन्य ट्रकों पर रोक लगती है तो वह एक बड़ा संकट बन सकता है। इसलिए हम BS-IV ट्रकों के लिए रेट्रोफिटिंग पर उपाय आमंत्रित कर रहे हैं।”

भारत स्टेज उत्सर्जन मानक (Bharat Stage Emission Standards – BSES) केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किए गए नियम हैं, जिनका उद्देश्य वाहनों से निकलने वाले प्रदूषकों को सीमित करना है।

इनोवेशन चैलेंज के चरण:

यह प्रतियोगिता कुल तीन चरणों में आयोजित होगी:

  1. पहला चरण: प्रतिभागियों द्वारा जमा किए गए प्रस्तावों का मूल्यांकन।

  2. दूसरा चरण: चुने गए प्रस्तावों का गहन अध्ययन और प्रमाणिकता की जांच।

  3. तीसरा चरण: चुनी गई तकनीक के परीक्षण के लिए ₹5 लाख की सहायता और नेशनल फिजिकल लैबोरेटरी (NPL) से प्रमाणन।

अधिकारियों ने बताया कि रेट्रोफिटिंग तकनीक को प्रमाणित करने से पहले इसकी प्रभावशीलता की कड़ी जांच की जाएगी।

यह एक महत्वपूर्ण पहल है जिससे वायु प्रदूषण कम करने, पुरानी तकनीक को उन्नत करने और दिल्ली को स्वच्छ बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाया जा रहा है।

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