ईयू-भारत साझेदारी सतत जल प्रबंधन को बढ़ावा देगी: जीआईजेड निदेशक लॉरा सुस्टर्सिक

GIZ Director Laura Sustersic

कोहिमा, 22 जुलाई (पीटीआई)

GIZ इंडिया की निदेशक, लौरा सुस्तेर्सिक ने मंगलवार को यूरोपीय संघ (ईयू) और भारत के बीच जल संसाधन चुनौतियों के समाधान के लिए रणनीतिक साझेदारी के महत्व पर जोर दिया। एक हितधारक कार्यक्रम में अपने प्रारंभिक संबोधन में, सुस्तेर्सिक ने कहा कि यह सहयोग सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने, यूरोपीय अनुभवों को भारतीय संदर्भ में अपनाने और जल प्रबंधन के लिए सतत् व व्यावहारिक समाधान विकसित करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है

वह नागालैंड सिविल सचिवालय में बाराक नदी बेसिन प्रबंधन योजना व भारतीय-ईयू पहल और ब्रह्मपुत्र बोर्ड के सहयोग पर आयोजित परामर्श बैठक में बोल रही थीं। इस पहल का फोकस समेकित जल संसाधन प्रबंधन, नवाचार, और स्थानीय ज़रूरतों के अनुसार जलवायु-लचीले उपायों पर है। सुस्तेर्सिक ने कहा, “इस साझेदारी के माध्यम से, हम क्षमताओं को मजबूत करने, नीति संवाद को प्रोत्साहित करने और सतत् जल उपयोग के लिए व्यावहारिक, समुदाय-आधारित दृष्टिकोण को बढ़ावा देने की आशा करते हैं।”

इस कार्यक्रम में सरकारी अधिकारी, पर्यावरण विशेषज्ञ और समुदाय प्रतिनिधि उपस्थित थे। चर्चा का केंद्र क्षेत्रीय जल संकट और प्रदूषण जैसे मुद्दे रहे, जो बदलते जलवायु पैटर्न के चलते और अधिक गंभीर हो रहे हैं।

राज्य जल संसाधन विभाग के अधिकारियों और ईयू प्रतिनिधियों ने भी इसी तरह की चिंताएं जताईं और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता एवं जमीनी कार्रवाई में समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। यह सहयोग बड़े ईयू-इंडिया वॉटर पार्टनरशिप (EU-IWP) का हिस्सा है, जिसे इंडो-जर्मन विकास सहयोग ढांचे के तहत GIZ द्वारा समर्थन प्राप्त है

बैठक में उन यूरोपीय जल प्रशासन मॉडलों और केस स्टडीज़ पर चर्चा की गई, जो भारत की विकेन्द्रित प्रशासनिक प्रणालियों में अपनाए जा सकते हैं। इस पहल का उद्देश्य चयनित भारतीय राज्यों में नवाचारों को पायलट करना है, जिससे दीर्घकालिक स्थिरता, समावेशन और अन्य क्षेत्रों में दोहराव की संभावना बढ़े।

यूरोपीय संघ और भारत के इस साझेदारी से—

  • नदी बेसिन प्रबंधन, जलवायु सहनशीलता, शहरी बाढ़ और जल प्रशासन में सहयोग बढ़ रहा है।
  • साझा अनुभव के आधार पर नई नीतियों और तकनीकों का विकास हो रहा है।
  • दीर्घकालिक, सतत् व समावेशी जल प्रबंधन की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं