‘नई दिल्ली, 27 जुलाई (PTI) — कांग्रेस ने रविवार को केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित पदों की भारी रिक्तता को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला और आरोप लगाया कि “नॉट फाउंड सूटेबल” (NFS) क्लॉज का दुरुपयोग इन वर्गों को उचित रोजगार के अवसरों से वंचित करने के लिए किया जा रहा है।
कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार द्वारा पिछले सप्ताह संसद में दिए गए लिखित उत्तर का हवाला देते हुए सरकार पर निशाना साधा।
राज्यसभा में 23 जुलाई को एक प्रश्न के उत्तर में मजूमदार ने बताया कि प्रोफेसर पद के लिए SC के लिए आरक्षित 308 में से केवल 111 पद भरे गए; ST के लिए 144 में से 24, और OBC के लिए 423 में से केवल 84 पद भरे गए।
एसोसिएट प्रोफेसर के लिए SC के 632 में से 308 पद, ST के 307 में से 108, और OBC के 883 में से 275 पद भरे गए।
असिस्टेंट प्रोफेसर के स्तर पर SC के 1,370 में से 1,180 पद, ST के 704 में से 595, और OBC के 2,382 में से 1,838 पद भरे गए हैं।
एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए रमेश ने कहा कि राज्यसभा में दिए गए उत्तर से यह सामने आया है कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में SC, ST और OBC आरक्षित फैकल्टी पदों में अत्यधिक रिक्तता है।
उन्होंने कहा, “प्रोफेसर स्तर पर OBC के 80%, ST के 83% और SC के 64% पद रिक्त हैं, जबकि सामान्य वर्ग में केवल 39% पद खाली हैं। एसोसिएट प्रोफेसर स्तर पर OBC के 69%, ST के 65% और SC के 51% पद रिक्त हैं, जबकि सामान्य वर्ग में केवल 16% रिक्तता है। असिस्टेंट प्रोफेसर स्तर पर OBC के 23%, ST के 15% और SC के 14% पद रिक्त हैं, जबकि सामान्य वर्ग में केवल 8% पद रिक्त हैं।”
रमेश ने कहा कि भले ही सरकार यह दावा करती हो कि वह फैकल्टी पदों की भर्ती में “नॉट फाउंड सूटेबल” (NFS) की घटनाओं का केंद्रीकृत रूप से डाटा इकट्ठा नहीं करती, लेकिन उपलब्ध आंकड़े इस प्रवृत्ति की स्पष्ट पुष्टि करते हैं।
उन्होंने तर्क दिया कि आरक्षित वर्गों में सामान्य वर्ग की तुलना में कहीं अधिक रिक्तियां, इस बात का संकेत हैं कि NFS का इन उम्मीदवारों पर अधिक उपयोग हो रहा है।
रमेश ने कहा, “यह स्पष्ट प्रमाण है उस मुद्दे का, जिसे @RahulGandhi ने उठाया है — कि NFS को SC, ST और OBC उम्मीदवारों को उचित रोजगार के अवसरों से वंचित करने और सार्वजनिक रोजगार में आरक्षण की संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने के लिए एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।”
शुक्रवार को राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए मोदी सरकार पर हमला बोला था और कहा था कि SC, ST और OBC के लिए आरक्षित पदों की भारी संख्या में रिक्तता केवल लापरवाही नहीं बल्कि “बहुजनों” को शिक्षा, शोध और नीति निर्माण से बाहर रखने की “सुनियोजित साजिश” है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि ऐसे सभी खाली पदों को तुरंत भरा जाए और “बहुजनों” को उनका अधिकार दिया जाए, न कि “मनुवादी बहिष्कार”।
PTI ASK/KVK
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