
नई दिल्ली, 27 जुलाई (पीटीआई) — कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को कहा कि दिल्ली में सैकड़ों झुग्गीवासियों को बेघर किया जा रहा है, उनके घरों को भाजपा सरकार द्वारा तोड़ा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह “अत्याचार” सत्तारूढ़ पार्टी की गरीबों के प्रति “असंवेदनशीलता” और “सत्ता के अहंकार” को उजागर करता है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी ने दिल्ली के अशोक विहार क्षेत्र की अपनी हालिया यात्रा का एक वीडियो साझा किया, जहां कई लोगों के घर प्रशासन द्वारा गिरा दिए गए थे।
उन्होंने हिंदी में एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किया,
“कल्पना कीजिए, अगर एक पल में आपके माता-पिता, बच्चों या भाई-बहनों के सिर से छत छीन ली जाए — आपका पूरा परिवार बेघर हो जाए, तो आपको कैसा लगेगा? दिल्ली की झुग्गियों में रहने वाले सैकड़ों गरीब परिवार आज इसी पीड़ा से गुजर रहे हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि जिन छोटे घरों में लोगों ने अपनी पूरी जिंदगी बसा ली थी, उन्हें “निर्दयता से नष्ट” कर दिया गया।
“ये सिर्फ घर नहीं थे — ये उनके सपने, उनकी गरिमा और उनकी आजीविका का साधन थे,” गांधी ने कहा।
“प्रशासन के नाम पर किया जा रहा यह अत्याचार भाजपा की गरीबों के प्रति असंवेदनशीलता और सत्ता के घमंड को दर्शाता है।”
उन्होंने कहा, “हम इन विस्थापित परिवारों के साथ मजबूती से खड़े हैं। अब यह लड़ाई सिर्फ घरों की नहीं, बल्कि न्याय और मानवता की है — और हम हर मोर्चे पर यह लड़ाई लड़ेंगे।”
पिछले हफ्ते गांधी ने अशोक विहार के जेलरवाला बाग और वजीरपुर में उन परिवारों से मुलाकात की थी, जिनके घरों को “दिल्ली की भाजपा सरकार ने बुलडोज़ कर दिया था।”
वीडियो में वह उन बेघर हुए परिवारों से बात करते हुए दिखाई देते हैं और उन्हें न्याय दिलाने और कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन देते हैं।
दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने पिछले महीने पश्चिमी दिल्ली के अशोक विहार में अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया था और 300 से अधिक अवैध मकानों को गिरा दिया था।
उत्तरी दिल्ली के वजीरपुर क्षेत्र में भी भारतीय रेलवे द्वारा एक साथ अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया गया।
यह कार्रवाई भारी पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती के बीच की गई थी। अशोक विहार के जेलरवाला बाग क्षेत्र से कुल 308 अवैध झुग्गियों को हटाया गया, जो DDA की अवैध बस्तियों को हटाने की कोशिश का हिस्सा था।
DDA के अनुसार, यह कार्रवाई उन झुग्गियों पर की गई, जिनके निवासी या तो पहले ही वैकल्पिक फ्लैटों के लिए आवंटित किए जा चुके थे या पुनर्वास नीति के तहत अपात्र पाए गए थे।
