नई दिल्ली, 28 जुलाई (PTI) — केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के छह अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की है, जिन पर दो साल पहले एक साथी कांस्टेबल के साथ “बर्बर और अमानवीय कस्टोडियल टॉर्चर” का आरोप है। FIR सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दर्ज की गई है।
FIR में डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) आज़ीज़ अहमद नैको के साथ-साथ सब-इंस्पेक्टर रियाज़ अहमद, और चार अन्य पुलिस अधिकारियों—जहांगीर अहमद, इम्तियाज़ अहमद, मोहम्मद यूनिस और शाकिर अहमद—का नाम है। ये सभी उस वक्त कुपवाड़ा के संयुक्त पूछताछ केन्द्र में तैनात थे।
पीड़ित कांस्टेबल खुर्शीद अहमद चोहान, जो बरामूला में तैनात थे, को फरवरी 17, 2023 को एक नशीली दवाओं से जुड़े मामले में कुपवाड़ा के SSP कार्यालय में पूछताछ के लिए बुलाया गया था। वहां पहुंचने पर उसे संयुक्त पूछताछ केंद्र सौंप दिया गया जहां DSP नैको और अन्य आरोपियों ने लगातार छह दिनों तक लोहे की छड़ और लकड़ी की छड़ से प्रताड़ना दी, साथ ही उसे विद्युत आघात भी दिए। पीड़िता (खुर्शीद की पत्नी) की शिकायत के अनुसार, फरवरी 26, 2023 को खुर्शीद के जननांग काटे गए और लगभग छह दिनों तक लोहे की छड़ें उसके निजी अंगों में डाली गईं। लाल मिर्च उसके गुदा मार्ग में डाली गई और उसके ऊपर विद्युत आघात भी दिए गए।
सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के उस फैसले को गलत ठहराया जिसमें CBI जांच से इनकार किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उस मामले में “अत्यंत गंभीर” कस्टोडियल अत्याचार हुआ है जिसमें आरोपी पुलिस अधिकारियों ने “पूरे प्रकार की अमानवीयता” दिखाई।
सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ित को 50 लाख रुपए के मुआवजे का आदेश दिया है, जिसे उन अधिकारियों से वसूल किया जाएगा जिन पर आरोप लगे हैं, और कहा है कि CBI जांच पूरी होने पर उन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू की जाए।
CBI ने FIR में हत्या के प्रयास, अभद्रता, गंभीर चोट पहुंचाने समेत कई धाराओं के तहत जांच शुरू की है। CBI जांच के अंतर्गत संयुक्त पूछताछ केंद्र के सभी CCTV फुटेज, संदिग्धों के बयान, फोरेंसिक जांच तथा संबंधित नियमों की समीक्षा भी की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस के दावे को गलत ठहराया कि पीड़ित ने आत्महत्या का प्रयास किया था और कहा कि चिकित्सा साक्ष्य स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि ये सभी चोटें आत्महत्याकांड की नहीं बल्कि कार्यवाही के दौरान हुईं।
यह मामला पुलिस की अमानवीयता और प्रणालीगत विफलता का गंभीर उदाहरण माना जा रहा है।
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