नई दिल्ली, 5 अगस्त (PTI) — दिल्ली की एक अदालत ने 2020 में 12 साल की नाबालिग लड़की से दुष्कर्म करने वाले एक व्यक्ति को 20 साल की कठोर न्यास कारावास की सजा सुनाई है, कहा कि आरोपी को कोई क्षमादान दिया जाना उचित नहीं।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अदिति गर्ग ने कहा कि बच्चे “अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपत्ति” हैं और राष्ट्र का भविष्य उनके विकास और उन्नति पर निर्भर है।
अदालत में उन अभियुक्त के खिलाफ अभियोजन पक्ष की दलीलों पर सुनवाई हुई, जिन्हें आईपीसी और पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 (गंभीर हमलावर यौन अत्याचार) के तहत दोषी ठहराया गया था।
न्यायालय ने कहा कि आरोपी को कोई क्षमादान नहीं मिलना चाहिए और 30 जुलाई को उसे पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत 20 वर्ष का कठोर कारावास सुनाया।
मुआवजे के संबंध में अदालत ने कहा, “बार-बार कानून, अंतरराष्ट्रीय घोषणाओं और न्यायिक निर्णयों में जोर दिया गया है कि बच्चे बहुत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपत्ति हैं और राष्ट्र की भविष्य की भलाई इस बात पर निर्भर करती है कि उसके बच्चे कैसे बढ़ते और विकसित होते हैं।”
पीड़िता को 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया।
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नई दिल्ली, 5 अगस्त (PTI) — दिल्ली की एक अदालत ने 2020 में 12 वर्षीय नाबालिग लड़की से दुष्कर्म करने वाले एक पुरुष को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है और कहा है कि उसे कोई भी क्षमादान नहीं दिया जाना चाहिए।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अदिति गर्ग ने कहा कि बच्चे “अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपत्ति” हैं और राष्ट्र का भविष्य उनके विकास और प्रगति पर निर्भर है।
अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता और पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 (गंभीर दुष्कर्म) के तहत दोषी ठहराया था।
सजा सुनाते हुए अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी के लिए कोई नरमी उचित नहीं है।
अदालत ने पीड़िता को 5 लाख रुपये मुआवजा भी दिया।
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