रेल मंत्री अश्विनी वैश्नव ने कहा: सभी मुख्य लाइन पैसेंजर कोच बायो-टॉयलेट से लैस, मानव अपशिष्ट से रेलवे फिटिंग्स की क्षरण रुकी

नई दिल्ली, 6 अगस्त (PTI) — रेलवे मंत्री अश्विनी वैश्नव ने लोकसभा में बुधवार को जानकारी दी कि भारतीय रेलवे के सभी मुख्य लाइन पैसेंजर कोच अब बायो-टॉयलेट से सुसज्जित हैं, जिससे रेलवे ट्रैक व फिटिंग्स पर मानव मल उत्सर्जन के कारण होने वाली क्षरण की समस्या समाप्त हो गई है।

उन्होंने बताया कि भारतीय रेलवे ने शून्य-निकास (Zero Discharge) बायो-टॉयलेट प्रणाली को अपनाया है, जो मानव अपशिष्ट को सीधे रेलवे ट्रैकों पर छोड़ने से रोकती है और स्वच्छता एवं सफाई को बेहतर बनाने में सहायक है। यह कार्य ‘मिशन मोड’ में तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

रेल मंत्री ने 2004-2014 की तुलना में 2014-2025 के बीच बायो-टॉयलेट से लैस कोचों की संख्या में जबरदस्त वृद्धि का जिक्र किया — जहां पहले केवल 9,587 कोचों में यह सुविधा थी, वहीं हाल के वर्षों में 3,33,191 कोच (लगभग 34 गुना अधिक) में बायो-टॉयलेट लगाए गए हैं।

बायो-टॉयलेट के ठीक से काम करने के लिए ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के दौरान सालाना जागरूकता अभियान चलाया जाता है, जो यात्रियों को कोचों और टॉयलेट्स की सफाई तथा बायो-टॉयलेट के सही उपयोग के प्रति संवेदनशील बनाता है।

साथ ही, गैर-बायोडिग्रेडेबल पदार्थों के कारण टॉयलेट्स के जाम न होने के लिए यात्रियों में सूचना प्रसार और सफाई के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।

पूरा बायो-टॉयलेट तंत्र लागू होने से रेलवे ट्रैकों की साफ-सफाई एवं स्टेशन क्षेत्रों में मानवीय मल-मूत्र की बदबू और दृश्यता समाप्त हो गई है, जिससे न केवल यात्रियों को स्वच्छ वातावरण मिला है बल्कि रैक और ट्रैक की सुरक्षा में भी वृद्धि हुई है।

रेलवे के रोलिंग स्टॉक के नीचे और ट्रैक पर मल होने के अभाव में रखरखाव कार्यों की गुणवत्ता बेहतर हुई है, जिससे रेलवे की संपत्ति की सुरक्षा भी सुनिश्चित हुई है, उन्होंने कहा।

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