नई दिल्ली, 6 अगस्त (PTI) — संसद ने 6 अगस्त 2025 को ‘The Carriage of Goods by Sea Bill, 2025’ पारित किया, जिसका उद्देश्य देश के समुद्री परिवहन कानूनों को आधुनिक बनाना और 1925 के पुराने भारतीय Carriage of Goods by Sea Act को प्रतिस्थापित करना है। यह बिल भारतीय सीमांत बंदरगाहों से माल के परिवहन से जुड़ी जिम्मेदारियों, दायित्वों, अधिकारों और कानूनी सुरक्षा को स्पष्ट करता है और यह 1924 के अंतरराष्ट्रीय हैग नियमों (Hague Rules) के अनुरूप है। बिल ने पुराने अधिनियम के सभी प्रावधानों को बरकरार रखा है लेकिन भाषा और संरचना को सरल बनाया है, जिससे भारतीय निर्यातकों, आयातकों और शिपिंग पेशेवरों के लिए इसे समझना आसान होगा।
शांतनु ठाकुर, राज्य मंत्री (बंदरगाह, शिपिंग और जलमार्ग) ने बताया कि यह बिल भारत की तेजी से बढ़ती समुद्री क्षेत्र की आवश्यकताओं को पूरा करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। बिल सरकार को यह शक्ति भी देता है कि वह अंतरराष्ट्रीय समुद्री संधियों के अनुसार भारत की नीतियों को तेजी से समायोजित कर सके। साथ ही, यह पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कार्यकारी अधिसूचनाओं पर संसद की निगरानी का प्रावधान करता है।
बिल की पारित होने के दौरान विपक्ष ने मतदाता सूची के विशेष तीव्र पुनरीक्षण (SIR) मुद्दे पर चर्चा की मांग की, लेकिन अध्यक्षा भुवनेश्वर कलिता ने गैर-संबंधित विषयों को रिकॉर्ड में दर्ज नहीं करने का निर्देश दिया।
यह विधेयक भारत के समुद्री वाणिज्य को वैश्विक मानकों के अनुरूप लाने और कानून के अस्पष्टताओं को कम करने में अहम भूमिका निभाएगा, जिससे विवाद और विवादास्पद मामलों की संभावना घटेगी। यह भारत को विश्व स्तर पर समुद्री व्यापार में प्रतिस्पर्धात्मक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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