सीपीआई(एमएल) लिबरेशन का आरोप— चुनाव आयोग बिहार SIR को लेकर सब कुछ ठीक दिखाने की कोशिश कर रहा है

नई दिल्ली, 6 जुलाई (PTI) — सीपीआई(एमएल) लिबरेशन ने बुधवार को चुनाव आयोग (EC) पर आरोप लगाया कि वह बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत ऐसे दिखाने की कोशिश कर रहा है कि सब कुछ सही चल रहा है और किसी भी पार्टी को कोई शिकायत नहीं है। पार्टी के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि कई पार्टियों की मांग के बावजूद EC बूथ स्तर पर डिलीट किए गए मतदाताओं की सूची साझा नहीं कर रहा है।

भट्टाचार्य ने लिखा, “EC यह संदेश देना चाहता है कि बिहार SIR अभियान में कोई शिकायत नहीं है और सब कुछ ठीक है। इससे ज़्यादा गलत कुछ नहीं हो सकता।” चुनाव आयोग ने कहा था कि ड्राफ़्ट मतदाता सूची पर राजनीतिक दलों से कोई आपत्ति या दावा नहीं मिला, लेकिन भट्टाचार्य ने इसका खंडन किया।

उन्होंने कहा, “ऐसा नहीं है कि आपत्तियां नहीं आ रही, EC खुद मानता है कि उसे अब तक सीधे मतदाताओं से लगभग 3,000 आपत्तियां मिली हैं (बूथ लेवल एजेंटों के ज़रिए नहीं), जिन्हें अभी संबोधित किया जाना बाकी है।”

भट्टाचार्य के मुताबिक, हटाए गए सभी मतदाताओं से नया फॉर्म 6 भरने के लिए कहा जा रहा है। उन्होंने सवाल किया, “EC को कैसे पता कि अब तक मिले करीब 15,000 फॉर्म 6 केवल नए वोटरों के हैं, न कि वे जिनका नाम हट गया?”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक पार्टियां EC से बार-बार बूथ लेवल डिलीशन सूची (और कारण सहित) मांग रही हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं। EC केवल समेकित सूची जारी करता है, जिससे हर डिलीटेट मतदाता का सत्यापन करना बेहद मुश्किल हो जाता है।

भट्टाचार्य ने सवाल उठाया कि “डेड” या “स्थायी रूप से बिहार से बाहर गए” मतदाताओं की बूथ-स्तरीय सूची Hindi में क्यों जारी नहीं की जा रही—सिर्फ अंग्रेज़ी में क्यों?

EC ने अपने बुलेटिन में कहा कि अब तक 3,659 दावे सीधे मतदाताओं से मिले हैं लेकिन राजनीतिक दलों के 1,60,813 बूथ लेवल एजेंटों (BLA) से कोई दावा नहीं मिला। साथ ही, 19,186 फॉर्म नए 18-वर्षीय मतदाताओं के हैं।

आयोग ने यह भी कहा कि वह संविधान और कानून के अनुसार निर्वाचन सूची को संशोधित कर रहा है।

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