
नई दिल्ली, 8 अगस्त (भाषा) शुक्रवार को राज्यसभा की कार्यवाही एक बार फिर ठप रही और दोपहर 12 बजे के कुछ समय बाद दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। यह कदम बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और कांग्रेस द्वारा लगाए गए ‘‘वोट चोरी’’ के आरोप सहित विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष के सदस्यों के जोरदार हंगामे के बीच उठाया गया।
कार्यवाही पहले 12 बजे तक के लिए स्थगित की गई थी, जब उपसभापति ने नियम 267 के तहत अन्य सभी कार्य स्थगित करने के लिए दिए गए सभी नोटिस खारिज कर दिए। इसके बाद, विपक्ष के लगातार हंगामे के चलते सदन को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया।
दोपहर 12 बजे सदन की बैठक पुनः शुरू होने के बाद, जब अध्यक्षता घनश्याम तिवारी कर रहे थे, उन्होंने सदस्यों से प्रश्नकाल चलने देने की अपील की, लेकिन विपक्ष के सदस्य अपने विरोध पर अड़े रहे।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कर्नाटक की एक विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी के मुद्दे पर ‘‘वोट चोरी’’ का मामला उठाने की कोशिश की, लेकिन अध्यक्ष ने उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी।
इसके बाद, कांग्रेस और अन्य विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी और कर्नाटक मतदाता सूची में गड़बड़ी और बिहार में एसआईआर के मुद्दे पर चर्चा की मांग की।
हंगामे के बीच, अध्यक्ष ने केंद्रीय राज्य मंत्री रवीनीत सिंह बिट्टू से प्रश्न का उत्तर देने को कहा, लेकिन बिट्टू ने विपक्ष पर ही ‘‘चोरी’’ जैसे कृत्यों में लिप्त होने का आरोप लगाया और ‘‘चोर मचाए शोर’’ का नारा लगाया।
विपक्ष के नारे और हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। अब उच्च सदन की अगली बैठक सोमवार सुबह 11 बजे होगी।
सुबह कार्यवाही की शुरुआत और पत्रों की प्रस्तुति के बाद ही, एसआईआर सहित विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी सांसदों के हंगामे के कारण सदन को पहले 12 बजे तक के लिए स्थगित किया गया था।
उपसभापति हरिवंश ने बताया कि उन्हें नियम 267 के तहत 20 नोटिस मिले हैं और कहा कि सदस्य विभिन्न विषयों पर निलंबन नोटिस दे रहे हैं, जिससे कार्यवाही में अव्यवस्था पैदा हो रही है। उन्होंने बताया कि आज प्राप्त 267 नोटिसों में पाँच अलग-अलग मुद्दे शामिल हैं।
तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि सोमवार से विपक्ष के सभी नोटिस केवल एसआईआर मुद्दे पर होंगे। माकपा के जॉन ब्रिटास ने नियम 267 को समाप्त करने की मांग की, जबकि कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने कहा कि विपक्ष सदन चलाना चाहता है और एसआईआर पर चर्चा होनी चाहिए।
डीएमके के तिरुची शिवा ने कहा कि नियम केवल कागजों पर नहीं, बल्कि व्यवहार में भी लागू होने चाहिए। अध्यक्ष ने बताया कि अब तक सत्र में सदन का 56 घंटे 49 मिनट का समय नष्ट हो चुका है। इस दौरान केवल 13 तारांकित प्रश्न, पांच शून्यकाल प्रस्तुतियां और 17 विशेष उल्लेख ही लिए गए हैं।
(भाषा)
