नई दिल्ली, 8 अगस्त (पीटीआई) – 2024 में 2 लाख से अधिक भारतीयों ने अपनी नागरिकता त्याग दी है, यह जानकारी सरकार ने शुक्रवार को लोकसभा में दी। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कांग्रेस सांसद के. सी. वेणुगोपाल के सवालों के लिखित जवाब में यह संख्या साझा की।
उन्होंने बताया कि मंत्रालय के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारतीय नागरिकता त्यागने वालों की संख्या वर्ष 2020 में 85,256, 2021 में 1,63,370, 2022 में 2,25,620, 2023 में 2,16,219 और 2024 में 2,06,378 रही। संदर्भ के लिए, यह संख्या साल 2011 में 1,22,819, 2012 में 1,20,923, 2013 में 1,31,405 और 2014 में 1,29,328 थी।
सरकार ने कहा कि भारतीय नागरिकता त्यागने या किसी अन्य देश की नागरिकता स्वीकार करने के कारण व्यक्तिगत होते हैं और केवल संबंधित व्यक्ति ही उन्हें जानता है।
विदेश राज्य मंत्री ने कहा, “ग्लोबल कार्यस्थल की संभावनाओं को देखते हुए सरकार ने ज्ञान अर्थव्यवस्था के युग में एक रूपांतरकारी बदलाव किया है। भारतीय डायस्पोरा के साथ जुड़ाव को भी मजबूत किया गया है।”
उन्होंने कहा कि एक सफल, समृद्ध और प्रभावशाली डायस्पोरा भारत के लिए एक मूल्यवान संसाधन है, जिससे भारत उनकी नेटवर्किंग और सॉफ्ट पावर का बेहतर उपयोग कर सकता है।
सरकार की कोशिशें डायस्पोरा की पूर्ण क्षमता का उपयोग करने पर भी केंद्रित हैं, जिसमें ज्ञान और विशेषज्ञता का आदान-प्रदान शामिल है।
सरकार ने एक अन्य प्रश्न का उत्तर देते हुए बताया कि वर्तमान में विदेश में भारतीयों की संख्या लगभग 3,43,56,193 है, जिनमें से 1,71,81,071 भारतीय मूल के व्यक्ति (PIO) और 1,71,75,122 गैर-निवासी भारतीय (NRI) हैं।
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