नई दिल्ली, 11 अगस्त (पीटीआई) – सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कोल्हापुर की एक मंदिर की हाथिनी ‘महादेवी’ को जामनगर स्थित वंतारा सेंक्चुरी के राधे कृष्ण मंदिर हाथी कल्याण ट्रस्ट में स्थानांतरित करने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी है।
मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई, न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन और ए.एस. चांडुरकर की पीठ के समक्ष यह मामला उल्लेखित किया गया।
एक वकील ने तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए कहा, “वंतारा नाम का एक सेंक्चुरी है और उन्होंने जबरन एक मंदिर की हाथिनी को ले लिया है।”
30 वर्षीय महादेवी पिछले तीन दशकों से कोल्हापुर जिले के नंदनी गांव स्थित जैन धार्मिक स्थल स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक पाट्टाचार्य महास्वामी संस्था की देखरेख में थी।
जामनगर के लिए हाथिनी के स्थानांतरण ने व्यापक विरोध प्रदर्शन को जन्म दिया है, जिसमें हजारों लोग सड़कों पर उतरकर उसकी वापसी की मांग कर रहे हैं।
जुलाई में बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंदिर ट्रस्ट द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उच्च स्तरीय समिति की सिफारिश को चुनौती दी गई थी। समिति ने कहा था कि हाथिनी के कल्याण को धार्मिक परंपराओं पर प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
इसके बाद, 28 जुलाई को न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया और हाथिनी के सुरक्षित व आरामदायक तरीके से जल्द से जल्द स्थानांतरण का निर्देश दिया था।
नई याचिका फिर से हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देती है।
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