नई दिल्ली, 11 अगस्त (पीटीआई) – दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को तिहाड़ जेल में चल रहे कथित वसूली रैकेट के आरोपों को लेकर CBI को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। इन आरोपों में कथित रूप से जेल अधिकारियों और कैदियों की संलिप्तता बताई गई है।
मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने इन आरोपों को “चौंकाने वाला” बताया और सरकार से इस पर “तत्काल” और “गंभीर” सोच-विचार करने को कहा।
हाईकोर्ट ने इससे पहले CBI को इन आरोपों की प्रारंभिक जांच करने का आदेश दिया था। सोमवार को अदालत ने प्रारंभिक जांच रिपोर्ट और स्थिति रिपोर्ट देखने के बाद कहा कि इसमें कैदियों और जेल अधिकारियों की संलिप्तता से जुड़े गंभीर तथ्य सामने आए हैं।
अदालत ने आदेश दिया— “इन तथ्यों के आधार पर CBI तत्काल FIR/RC दर्ज करे और जांच करे। अगली सुनवाई पर CBI अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश करे।”
याचिका में आरोप लगाया गया कि जेल परिसरों में सुविधाएं दिलाने के लिए जेल अधिकारियों की मिलीभगत से अंदर और बाहर के कुछ लोग कैदियों से पैसे वसूलते हैं। अदालत ने कहा कि जांच केवल जेल अधिकारियों तक सीमित न रहे, बल्कि इसमें शामिल कैदियों के रिश्तेदारों और यहां तक कि याचिकाकर्ता की भूमिका की भी पड़ताल की जाए।
पीठ ने कहा— “हमारे पास जो रिपोर्ट आई है, उसे देखकर यह समझना कठिन है कि जेलों में यह सब कैसे हो रहा है। बुनियादी जरूरतें देने में नाकाम, लेकिन जो पैसे दे सकते हैं, वे वहां ऐश कर रहे हैं। जो लोग यह वहन नहीं कर सकते, उनका क्या?”
अदालत ने राज्य सरकार पर सभी कैदियों को बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने की जिम्मेदारी डाली। साथ ही, निरीक्षण जज की रिपोर्ट में कॉल रिकॉर्ड, जेल की आधिकारिक लैंडलाइन के दुरुपयोग और भीतर-बाहर के लोगों की संदिग्ध बातचीत जैसे सबूत शामिल हैं, जो आपराधिक गतिविधियों की ओर इशारा करते हैं।
इस मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त को होगी।
श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़
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