नई दिल्ली, 11 अगस्त (पीटीआई) – दिल्ली जू में पिछले तीन दिनों के भीतर दो बाघ शावकों की मौत हो गई है। यह घटना ठीक एक हफ्ते बाद हुई जब जू ने दो दशकों में पहली बार छह शावकों का सबसे बड़ा जन्म समूह (लिटर) मनाया था।
ये शावक 7 वर्षीय बाघिन ‘अदिति’ के पहले लिटर में 4 अगस्त की सुबह 9 बजे से 11 बजे के बीच पैदा हुए थे। अदिति को नागपुर के गोरेवाड़ा रेस्क्यू सेंटर से लाया गया था।
जू निदेशक संजीत कुमार ने बताया कि मां अदिति बच गए चारों शावकों को दूध पिला रही है और उनकी सीसीटीवी व मैनुअल मॉनिटरिंग के जरिए लगातार निगरानी की जा रही है।
पहला शावक, जो लिटर में सबसे छोटा था, 8 अगस्त की सुबह बाड़े में मृत पाया गया। दूसरा शावक, जो कमजोर था और मां का दूध नहीं पी पा रहा था, को 9 अगस्त की रात जू अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 10 अगस्त की रात उसकी मृत्यु हो गई।
कुमार ने कहा, “मां को दूध उत्पादन के लिए सप्लीमेंट दिए जा रहे हैं। बाकी के शावक स्वस्थ हैं और सामान्य रूप से दूध पी रहे हैं।”
इस जन्म से पहले जू में छह सफेद बाघ और सात रॉयल बंगाल बाघ थे।
2023 में, बाघिन ‘सिद्धि’ (जो गोरेवाड़ा से ही लाई गई थी) ने पांच शावकों को जन्म दिया था, जो 18 साल बाद जू में रॉयल बंगाल बाघ का पहला सफल जन्म था। इनमें से केवल दो शावक ही जीवित रह पाए।
2005 में पैदा हुए छह शावकों में से भी केवल दो बचे थे।
2022 में सफेद बाघिन ‘सीता’ ने तीन शावकों को जन्म दिया था, जिनमें से दो जीवित रहे। अधिकारियों के अनुसार, “इतने बड़े लिटर में 100% शावकों का जीवित रहना बेहद कठिन होता है।”
दिल्ली जू में 1 नवंबर 1959 से बाघ रखे जा रहे हैं और 2010 से यह टाइगर संरक्षण और प्रजनन केंद्र के रूप में मान्यता प्राप्त है।
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