नई दिल्ली, 12 अगस्त (पीटीआई) – दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली पुलिस से पूछा कि सांसद इंजीनियर राशिद को संसद के मानसून सत्र में भाग लेने के लिए जो यात्रा खर्च (करीब ₹4 लाख) जमा करने को कहा गया, वह किस आधार पर तय किया गया। अदालत ने पुलिस से इस हिसाब का ब्रेकअप पेश करने को कहा और अगली सुनवाई 18 अगस्त के लिए रखी।
पृष्ठभूमि:
इंजीनियर राशिद वर्तमान में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं और आतंकी फंडिंग के मामले में मुकदमे का सामना कर रहे हैं।
एक पूर्व आदेश के तहत उन्हें संसद सत्र में भाग लेने के लिए कस्टडी पैरोल दी गई थी, लेकिन शर्त रखी गई कि वे यात्रा व सुरक्षा खर्च खुद वहन करें।
जेल प्रशासन ने राशिद को करीब ₹1.45 लाख प्रतिदिन और कुल मिलाकर ₹4 लाख से ₹17 लाख तक का बिल थमाया, जिसमें पुलिस टीम की तैनाती, वाहन, सुरक्षा तथा अन्य व्यवस्थाएं शामिल थीं।
कोर्ट में पैरवी कर रहे वकील का तर्क है कि जनप्रतिनिधि होने के नाते संसद में जाना उनका कानूनी कर्तव्य है, ऐसे में इतनी भारी-भरकम फीस वसूलना अनुचित और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।
हाई कोर्ट की टिप्पणी और सवाल:
अदालत ने पूछा कि खर्च की गणना किन मदों से की गई, इसका उल्लेख 26 मार्च 2025 के पुलिस पत्र में कैसे हुआ?
कोर्ट ने पुलिस से स्पष्ट ब्रेकअप मांगा कि “इस खर्च के हर हिस्से का आधार क्या है?” और इसपर अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आम तौर पर कस्टडी पैरोल के दौरान ऐसी जरूरतें (जैसे यात्रा व्यवस्था) व्यक्ति को खुद वहन करनी पड़ती है, लेकिन इतना ऊंचा खर्च क्यों — यह राज्य को स्पष्टीकरण देना है।
श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़
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