नई दिल्ली, 12 अगस्त (पीटीआई) – सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली-एनसीआर में 10 साल से पुराने डीज़ल वाहनों और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहनों के मालिकों को बड़ी राहत देते हुए आदेश दिया कि उनके खिलाफ कोई दंडात्मक (coercive) कार्रवाई न की जाए।
यह मामला शीर्ष अदालत के 29 अक्टूबर 2018 के उस आदेश की पुनर्विचार याचिका से जुड़ा है, जिसमें राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देश को बरकरार रखा गया था। NGT ने 26 नवंबर 2014 को आदेश दिया था कि 15 साल से अधिक पुराने किसी भी डीज़ल या पेट्रोल वाहन को सड़कों पर चलने से रोका जाए और उल्लंघन होने पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत जब्त किया जा सकता है। यह नियम सभी प्रकार के वाहनों पर लागू था — दोपहिया, तिपहिया, चारपहिया, हल्के और भारी वाहन, चाहे वे वाणिज्यिक हों या निजी।
इन आदेशों के पीछे उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में विशेषकर सर्दियों में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को नियंत्रित करना था।
नया आदेश:
मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई, न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने दिल्ली सरकार की अर्जी पर सुनवाई करते हुए कहा:
“हम निर्देश देते हैं कि फिलहाल 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों के मालिकों के खिलाफ इस आधार पर कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा।”
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस प्रतिबंध के कारण लोग अपनी गाड़ियां केवल इसलिए बेचने को मजबूर हैं, जबकि वे बहुत कम चली होती हैं।
उन्होंने उदाहरण दिया कि कोई वाहन 10 साल पुराना है लेकिन केवल 2,000 किलोमीटर चला है, फिर भी उसे बेचना पड़ रहा है; जबकि एक टैक्सी दो साल में एक लाख किलोमीटर चल सकती है और आगे आठ साल तक भी चल सकती है।
याचिका में केंद्र और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) से यह आकलन करने के लिए व्यापक अध्ययन कराने का अनुरोध किया गया है कि उम्र-आधारित प्रतिबंध के बजाय उत्सर्जन-आधारित मानकों से वास्तविक पर्यावरणीय लाभ कितना होगा।
श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़
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